मुख्यपृष्ठखबरेंश्रीनगर के ग्रेनेड हमला: पुलिस ने दो हमलावरों को पकड़ने का किया...

श्रीनगर के ग्रेनेड हमला: पुलिस ने दो हमलावरों को पकड़ने का किया दावा

हमले के विरोध में पहली बार कैंडल मार्च किया गया आयोजित
–सुरेश एस डुग्गर–
जम्मू, 9 मार्च। रविवार को श्रीनगर के अमीराकदल इलाके में हुए ग्रेनेड हमले के सिलसिले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हमले में दो आम नागरिकों की मौत हो गई थी और 36 अन्य घायल हुए थे। आज पुलिस ने यह जानकारी दी। मोहम्मद बारिक नामक पहले आरोपी को खानयार से गिरफ्तार किया गया था और उससे आरंभिक पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी फाजिल नबी सोफी को गिरफ्तार किया गया। ग्रेनेड हमले में इस्तेमाल किए गए दोपहिया वाहन को भी विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जब्त कर लिया है। आतंकी हमले के तुरंत बाद इस एसआईटी का गठन किया गया था।
ग्रेनेड हमले में इस्तेमाल किए गए दोपहिया वाहन को भी विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जब्त कर लिया है। अपनी जांच के दौरान टीम ने जांच के लिए अत्याधुनिक साधनों का इस्तेमाल किया और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, पूरे श्रीनगर शहर में सीसीटीवी के फुटेज, सेल टावर डंप विश्लेषण, आईपी डंप विश्लेषण किया और कुछ चश्मदीदों से पूछताछ के आधार पर अपराध स्थल पर घटना का पुनर्चित्रण किया गया।
इस बीच श्रीनगर में ग्रेनेड हमले का विरोध करने कश्मीरी एक साथ आए। तीन दशकों ऐसा पहली बार था जब सभी सभी क्षेत्रों के कश्मीरियों ने हमले का एक साथ विरोध किया। एक घंटे से अधिक समय तक जारी कैंडललाइट विरोध कश्मीर घाटी में एक अलग तरह का प्रदर्शन था। समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने लाल चौक पर कैंडल मार्च निकाला और बाद में घंटा घर के पास फुटपाथ पर धरना दिया और आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रदर्शित की।
प्रदर्शनकारियों ने आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए और हाथों में तख्तियां लिए हुए देखे गए जिस पर लिखा था ‘आखिर कब तक’ (जब तक हमें सहना होगा) जबकि हवा में ‘युवा बचाओ, कश्मीर बचाओ’ के नारे लगे। वहीं तिरंगा लिए कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने दोषियों के लिए सजा की मांग की है. जबकि एक 70 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी, 20 वर्षीय राफिया नज़ीर, जो विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गई थी और सिर में गंभीर चोट लगी थी ने ने भी बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
हमले में एक पुलिसकर्मी समेत 33 लोग घायल हो गए थे। एक प्रदर्शनकारी का कहना था कि आज मानवाधिकार कार्यकर्ता कहां हैं? एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य निकाय कहां हैं जब दो नागरिक मारे गए और 33 अन्य घायल हो गए?  एक अन्य प्रदर्शनकारी, परवेज अहमद ने सवाल किया, “जब अंतर्राष्ट्रीय मीडिया कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों की हत्या पर प्रकाश डालता है, तो जब आतंकवादी नागरिकों को मारते हैं तो चुप क्यों रहते हैं? या हमें यह अनुमान लगाना चाहिए कि जब नागरिकों को निशाना बनाया जाता है तो यह उनके लिए स्वीकार्य होता है? एक अन्य प्रदर्शनकारी साजिद यूसुफ ने कहा कि वे न्याय की गुहार लगाने के लिए एकत्र हुए थे. उन्होंने कहा, ‘कश्मीरी हिंसा से बाहर आना चाहते हैं और युवा कार्यकर्ताओं के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस तरह के कार्य के खिलाफ आवाज उठाएं।

अन्य समाचार