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सियासी ‘माया’ …बेटा बागी, मेनका संघ की शरण में !

• अनिश्चित भविष्य से चिंतित मेनका पहुंचीं संघ भवन, बांधी संघ प्रचारकों को राखी

विक्रम सिंह / सुल्तानपुर
अजब सियासत है गांधी परिवार की भी ! कुछ ही वक़्त पहले मेनका-वरुण बीजेपी में नेहरू परिवार की भगवा ब्रिगेड माने जाते थे। अब तो हालात इस कदर जुदा हैं कि सत्ता पक्ष में रहते हुए बीजेपी सांसद वरुण गांधी विपक्ष के नेताओं से भी ज्यादा तीखे हमले पीएम मोदी और सीएम योगी पर कर रहे हैं। वे अब तकनीकी तौर पर ही बीजेपी का हिस्सा हैं। वहीं पार्टी और सरकार में निरंतर पर कतरे जाने से ‘अलग थलग’ उनकी मां मेनका गांधी के अंदाज जुदा हैं। बेटे वरुण की तुलना में वे संघ-भाजपा के प्रति सॉफ्ट हैं। बेटा बागी हो चुका है तो मेनका रक्षाबंधन पर अपने संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारकों को राखी बांधती नजर आईं। मां-बेटा के इस परस्पर विरोधाभासी अंदाज से तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मोदी-२ को छोड़कर सन १९८९ से ही लगातार केंद्र की हरेक गैरकांग्रेसी सरकार में मंत्री रह चुकी कांग्रेस की ताकतवर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छोटी बहू मेनका गांधी अब सियासत के उत्तरार्द्ध में हैं। भाजपा में रहकर बेटा बागी है तो वे स्वयं ‘संघ’ की शरण में हैं। इस सप्ताह वे अपने संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर में तीन दिन के प्रवास पर थीं। संगठन की स्थानीय इकाई के पदाधिकारियों को साथ लेकर पहले तो उन्होंने क्षेत्र में विविध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और फिर आखिरी दिन आरएसएस के विभाग कार्यालय ‘संघ भवन’ जा पहुंचीं। जहां पर मेनका गांधी ने वरिष्ठ प्रचारक प्रज्ञा प्रवाह के यूपी बिहार प्रमुख रामाशीष , विभाग प्रचारक श्रीप्रकाश व जिला प्रचारक आशीष आदि को रक्षा सूत्र बांधा। यूं तो वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष ने सांसद मेनका के राखी बांधने के घटनाक्रम को ‘सामान्य’ तौर पर लिया। मीडिया से बातचीत में कहा भी, ‘रक्षाबंधन हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। राष्ट्र रक्षा के संकल्प के साथ संघ ये पर्व सदैव प्रमुखता से मनाता है।’….लेकिन राजनीति में कोई भी कार्य अनायास नहीं  किया जाता है। ऐसे में सियासी गलियारों में जब मेनका-वरुण के भाजपा में भविष्य को लेकर संशय जताया जा रहा है तब संघ प्रचारकों को राखी बांधने का घटनाक्रम अर्थपूर्ण हो चला है। माना जा रहा है कि बेटे व खुद अपने भविष्य को लेकर चिंतित मेनका अब संघ की शरण में हैं।

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