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स्वास्थ्य को संजीवनी!…बजट में ११ हजार करोड़ का प्रावधान

मुंबई । कोरोना महामारी में महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों की संसार भर में प्रशंसा हुई। ऐसे में इस ख्याति को बनाए रखते हुए स्वास्थ्य सेवा को और मजबूती प्रदान करने के लिए राज्य सरकार के बजट में ११,००० करोड़ रुपए का प्रावधान करने की घोषणा की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिव स्वास्थ्य योजना के साथ ही आगामी तीन वर्षों में क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और नए अस्पतालों के लिए यह राशि खर्च कर उन्हें संजीवनी दी जाएगी।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अजीत पवार ने कहा कि बीते दो सालों से हम कोविड महामारी से जूझ रहे हैं। इन सबके बीच राज्य सरकार ‘मेरा कुटुंब, मेरी जिम्मेदारी’ और ‘हर घर दस्तक’ योजना को लाई, जिसे नागरिकों का जोरदार प्रतिसाद मिला। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने के साथ ही और मजबूती प्रदान करने के लिए आगामी तीन वर्षों में ११ हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।
मददगार साबित होगा शिव आरोग्य योजना
ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले मरीजों को शहरी क्षेत्रों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से जोड़ने के लिए राज्य सरकार शिव आरोग्य योजना ला रही है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की बीमारियों का निदान और उपचार संभव होगा। राज्य सरकार इसके लिए हर जिला अस्पताल में टेलिमेडिसिन केंद्र की स्थापना करेगी। इसके अलावा अगले चरण में उपजिला अस्पताल में इस सेवा का विस्तार किया जाएगा।
शुरू होगी लिथोट्रिप्सी उपचार पद्धति
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों की बिना सर्जरी के किडनी स्टोन बाहर निकालने के लिए लिथोट्रिप्सी उपचार पद्धति उपलब्ध कराने का निर्णय सरकार ने लिया है। इसके तहत तीन साल की समयावधि में २०० बेड वाले सभी अस्पतालों में यह पद्धति शुरू की जाएगी। योजना पर १७.६० करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया है। किडनी स्टोन का उपचार मुफ्त में किया जाएगा।
प्रथम दर्जे की शासकीय ट्रॉमा केयर यूनिट की होगी स्थापना
मुंबई से बाहर प्रथम दर्जे की शासकीय ट्रॉमा केयर यूनिट न होने से गंभीर रूप से घायलों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इसे देखते हुए नांदेड, अमरावती, जालना, भंडारा, नगर और सातारा में ट्रामा केयर यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसके लिए निवेश खर्च १०० करोड़ और रिक्यूरिंग एक्सपेंडिचर पर १८ करोड़ रुपए की निधि उपलब्ध कराई गई है।
फेको से होगा आंखों का उपचार
आंखों की सबसे सामान्य बीमारी मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक फेको उपचार तकनीक शुरू करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके लिए कुल ६० अस्पतालों में यह उपचार पद्धति शुरू की जाएगी, जिसके लिए पहले चरण में २० करोड़ रुपए की निधि उपलब्ध कराई जाएगी। दूसरी तरफ ५० बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों में कपड़ों की धुलाई, मशीन संयत्र और ३० बेड से अधिक के अस्पतालों में स्वच्छता यंत्र दिया जाएगा।
राज्य में चलेंगी आठ  कैंसर डिटेक्शन वैन
वैंâसर का समय पर निदान करने के लिए आठ आरोग्य मंडल के लिए ८ मोबाइल वैंâसर डिटेक्शन वैन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए आठ करोड़ का प्रावधान किया गया है।
सभी जिलों में महिला व नवजात शिशु अस्पताल
राज्य के सभी जिलों में महिला व नवजात शिशु अस्पताल की स्थापना की जाएगी। १६ जिलों में १०० बेड वाला महिला अस्पताल बनाया जाएगा। जालना में ३६५ बेड के नए प्रादेशिक मनोचिकित्सालय का निर्माण किया जाएगा। इसके निर्माण पर ६० करोड़ खर्च किए जाने का प्रावधान बजट में किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपजिला अस्पताल स्तर पर आगामी तीन सालों में विस्तार और विकास किया जाएगा।
इंद्रायणी मेडिसिटी होगा साकार
पुणे शहर के निकट ३०० एकड़ में अत्याधुनिक इंद्रायणी मेडिसिटी साकार करने का विचार राज्य सरकार ने किया है। इसमें अस्पताल, वैद्यकीय संसोधन, दवा उत्पादन, वेलनेस, फिजियोथेरेपी केंद्र आदि उपलब्ध होंगे। सभी उपचार को एक ही स्थान पर करानेवाली यह देश की पहली वैद्यकीय कॉलोनी होगी। इसके लिए २,०६१ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य शिक्षा में पोस्ट ग्रेज्युएट पाठ्यक्रम को शुरू करने के लिए मुंबई के सेंट जॉर्ज, नासिक और नागपुर में संस्था स्थापित की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा कार्य प्रणाली के लिए १०० करोड़
खाद्य सुरक्षा कार्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए खाद्य जांच प्रणाली, प्रयोगशाला सक्षमीकरण और इट राइट कार्यक्रमों को चलाया जाएगा। इसके लिए आगामी दो सालों में १०० करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है।
कोरोना से विधवा महिलाओं के लिए विशेष योजना
कोरोना के कारण विधवा महिलाओं के लिए पंडिता रमाबाई महिला उद्योग योजना की घोषणा की गई है, जो इन महिलाओं को स्वरोजगार के लिए पूंजी प्रदान करेगी।
मुंबई के पशु वैद्यकीय महाविद्यालय की होगी मरम्मत
परेल स्थित बैल-घोड़ा अस्पताल उर्फ पशु वैद्यकीय महाविद्यालय का निर्माण २ अगस्त, १८८६ में हुआ था। यह अस्पताल १२० साल से भी ज्यादा पुराना है। ऐसे में इसमें बनी १० इमारतों को ऐतिहासिक धरोहर की मान्यता प्राप्त हुई है। इस धरोहर को संभालने के लिए वित्त वर्ष २०२२-२३ में देखभाल और मरम्मत के लिए १० करोड़ का प्रावधान किया गया है।

मिशन ऑक्सीजन स्वावलंबन
प्रदेश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी थी। मिशन ऑक्सीजन स्वावलंबन के तहत १,८७० करोड़ रुपए के निवेश से १४४ नवीन प्रकल्प तैयार कर १,४८० मीट्रिक टन अतिरिक्त ऑक्सीजन उत्पादन करने की क्षमता तैयार की गई। अब राज्य मेडिकल ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है।

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