मुख्यपृष्ठनए समाचार१० ग्राम ड्रग्स और डेथ! ... सिंगापुर में ९ दिनों में ३...

१० ग्राम ड्रग्स और डेथ! … सिंगापुर में ९ दिनों में ३ को फांसी

हिंदुस्थान में ड्रग्स से जुड़े कानून सख्त हैं, पर फांसी नहीं होती। मगर यदि किसी शख्स के पास से सिंगापुर में ड्रग्स बरामद हुआ तो वहां डेथ तय है। सिंगापुर में हालिया नौ दिनों के भीतर तीन लोगों को फांसी की सजा देने की घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इसमें एक महिला समेत दो आरोपियों को फांसी दी जा चुकी है, जबकि तीसरे को आगामी गुरुवार को फांसी दी जानी है। यदि वहां किसी के पास १० ग्राम भी ड्रग्स मिली तो डेथ तय है। गत २८ जुलाई को जिस सरिदेवी बिंते नामक महिला को फांसी दी गई, उसके पास से सिर्फ ३१ ग्राम हेरोइन मिली थी। इसके साथ ही २० साल बाद किसी महिला को वहां फांसी दी गई।
२० साल पहले जिस महिला को फांसी दी गई थी, उसके ऊपर भी ड्रग्स का ही आरोप था। इसके पहले गत अप्रैल में तमिलनाडु के तंगराजू सुप्पैया को फांसी दी गई थी। तब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संगठनों ने सुप्पैया को फांसी नहीं देने की काफी मुहिम चलाई थी। सुप्पैया पर सिंगापुर में एक किलोग्राम गांजे की तस्करी का आरोप था। उसे २०१८ में मौत की सजा सुनाई गई थी।
सिंगापुर पर्यटन के लिए मशहूर स्थल के साथ दुनिया का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी है। मगर ड्रग्स के मामले में वहां का कानून बहुत ही सख्त है। यह ब्रिटिश उपनिवेश मलेशिया से अलग होने के बाद १९६५ में जब स्वतंत्र राष्ट्र बना तो फांसी का कानून विरासत में मिला। पर १९७३ में वहां मादक पदार्थ को भी इस सख्त सजा में शामिल कर लिया गया। पिछले साल सिंगापुर में ११ आरोपियों को फांसी की सजा दी गई थी। इस साल ८ फांसी की सजा दी जा चुकी है।
कानूनी अधिकारों से वंचित
गत अप्रैल में, जब हिंदुस्थानी सुप्पैया को फांसी दी गई थी तब संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के एक समूह ने सिंगापुर में नशीली दवाओं के अपराधों के लिए फांसी की दर को ‘अत्यधिक चिंताजनक’ बताया। इसको लेकर काफी विवाद हुआ था क्योंकि पुलिस पूछताछ के दौरान उसे पर्याप्त कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया था। सिंगापुर की सरकार पब्लिक प्रोटेस्ट और मीडिया को सख्ती से कंट्रोल करती है। इसने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ मौत की सजा के इस्तेमाल का बचाव किया और सर्वेक्षणों का हवाला दिया है कि अधिकांश नागरिक इस कानून का समर्थन करते हैं।
इस अमीर देश ने कोविड​​ के दौरान एक छोटे से ब्रेक के बाद फांसी दिए जाने का सिलसिला फिर से शुरू किया है। गत बुधवार को ५७ साल के मोहम्मद अजीज बिन हुसैन को करीब ५० ग्राम हेरोइन की तस्करी के आरोप में फांसी दे दी गई थी। अब कल एक और वैâदी को फांसी दी जाएगी। इसका नाम है मोहम्मद लतीफ। उसे ५४.०४ ग्राम डायमॉर्फिन की तस्करी का दोषी पाया गया था।
८० फीसदी पक्ष में
२००५ में द ‘स्ट्रेट्स टाइम्स’ द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में, सिंगापुर के ९५ फीसदी लोगों का मानना था कि उनके देश में मृत्युदंड बरकरार रहना चाहिए। ताजा सर्वे में ८० फीसदी से अधिक लोगों का मानना है कि मृत्युदंड बरकरार रखना चाहिए।
सबसे सख्त कानून
सिंगापुर में नशीली दवाओं का विरोधी कानून दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में से एक है। ५०० ग्राम से अधिक गांजा या १५ ग्राम हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़े जाने पर किसी को भी मौत की सजा दी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
इस मामले में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नशीली दवाओं के अपराधों के लिए मृत्युदंड का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था, ‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से उन देशों से, जिन्होंने कानूनी तौर पर या व्यवहारिक तौर पर मौत की सजा को समाप्त कर दिया है, उनसे सिंगापुर में इस अमानवीय, अप्रभावी और भेदभावपूर्ण प्रथा को रोकने में मदद करने का आह्वान करते हैं।’

मौत की सजा में छठवां नंबर
दुनिया में ५८ देश सजा-ए-मौत के लिए फांसी देते हैं। इनमें से सिंगापुर सबसे ज्यादा सजा देने के मामले में छठे नंबर पर है। गत वर्ष चीन पहले नंबर पर था। वह आंकड़े जाहिर नहीं करता पर माना जाता है कि वहां १,००० से ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी गई। ५७६ सजा-ए-मौत के साथ ईरान दूसरे नंबर पर है। १९६ के साथ सऊदी अरब तीसरे, २४ के साथ इजिप्ट चौथे और १८ मौतों के साथ अमेरिका पांचवें नंबर पर है।

अन्य समाचार