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१०८ पूर्व अफसरों ने लिखा पीएम मोदी को पत्र…. बदले की राजनीति बंद करो!

• नफरत की आग रोको
सामना संवाददाता / मुंबई । २०१४ में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में भाजपा के लोग केंद्रीय एजेंसियों की मदद से अपने सहयोगियों को समेटने और विरोधियों को खत्म करने का लगातार प्रयास करते रहे हैं। लेकिन २०२१ में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार ने भाजपा को डरा दिया और भाजपा देश को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंकने की साजिश रचने लगी है। यूपी सहित ४ राज्यों में हिजाब विवाद का लाभ मिलने से उत्साहित भाजपा ने अब सांप्रदायिकता का दायरा बढ़ा दिया है। हिजाब के बाद भाजपा अपनी बी, सी पार्टी सहित दूसरे छिपे सहयोगियों को ‘सुपारी’ देकर हलाल, भोंगा और हनुमान चालीसा जैसे मुद्दों को हवा दे रही है। इससे देश का माहौल लगातार दूषित हो रहा है। देश का लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्ष ढांचा चरमरा रहा है। ऐसा बुद्धिजीवियों खासकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लगने लगा है इसलिए १०८ पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी को नफरत की आग को पैâलने न देने तथा द्वेष की राजनीति को रोकने की गुहार लगाई है।
बता दें कि देश में इन दिनों नफरत और द्वेष की राजनीति बढ़ने से कई पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी चिंतित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, पूर्व गृहसचिव जी.के. पिल्लई, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल गवर्नर नजीब जंग और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव टी. के. ए. नायर ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस नफरत और द्वेष की आग को रोकने की अपील की है। पत्र के माध्यम से पूर्व अधिकारियों ने कहा है कि पीएम मोदी इस आग पर रोक लगाएं, इसे और न बढ़ाएं। इस पर रोक की सख्त जरूरत है। पूर्व अफसरों ने देश में नफरत से भरी तबाही के उन्माद की आशंका जताई है, जहां बलि की वेदी पर न केवल मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्य हैं, बल्कि संविधान भी है। गौरतलब हो कि पीएम नरेंद्र मोदी को १०८ पूर्व नौकरशाहों ने पत्र लिखकर उम्मीद जताई है कि वे ‘नफरत की राजनीति’ को समाप्त करने का आह्वान करेंगे। पत्र में कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण वाली राज्य सरकारों में कथित तौर पर नफरत और द्वेष की आग भड़काई जा रही है। ऐसी राजनीति पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट लिखा है कि पूर्व लोक सेवकों के रूप में हम आमतौर पर खुद को इतने तीखे शब्दों में व्यक्त नहीं करना चाहते हैं, लेकिन जिस तेज गति से हमारे पूर्वजों द्वारा तैयार संवैधानिक इमारत को नष्ट किया जा रहा है, वह हमें बोलने अपना गुस्सा और पीड़ा व्यक्त करने के लिए मजबूर करता है। पिछले कुछ वर्षों और महीनों में कई राज्यों असम, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुसलमानों के प्रति नफरत एवं हिंसा में वृद्धि ने एक भयावह नया आयाम हासिल कर लिया है। दिल्ली को छोड़कर इन राज्यों में भाजपा की सरकार है। पत्र में कहा है कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास आपके इस वादे को पुन: याद दिलाते हैं और आपसे उक्त राजनीति को रोकने की अपील करते हैं। हमें अपेक्षा है कि आप आजादी के इस अमृत महोत्सव को पक्षपातपूर्ण विचारों से ऊपर उठकर, नफरत की राजनीति से परे होकर मनाने की लोगों से अपील करेंगे।

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