मुख्यपृष्ठनए समाचार१९ मिनट की धक-धक...  चंद्रयान आज चूमेगा चांद की सतह

१९ मिनट की धक-धक…  चंद्रयान आज चूमेगा चांद की सतह

समय : शाम ६ बजकर ४ मिनट

आज का दिन हिंदुस्थान के अंतरिक्ष अभियान के इतिहास में खास है। चंद्रयान ३ की लैंडिंग का वक्त करीब आ चुका है। पिछली बार मिशन फेल हो गया था इसलिए इस बार इसे लेकर इसरो ने खास तैयारियां की हैं। लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर लैंडिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आज शाम घड़ी जैसे ही ६ बजकर ४ मिनट बजाएगी, अपना विक्रम चांद की सतह को चूम लेगा। लेकिन इससे पहले आखिरी १९ मिनट का वक्त काफी धक-धक करनेवाला होगा। मिशन को लेकर इसरो ने ट्वीट करके बताया है, ‘मिशन चंद्रयान-३ तय समय पर है, सिस्टम की नियमित जांच चल रही है।’ इसरो चीफ एस सोमनाथ के अनुसार, बंगलुरु में मिशन ऑपरेशन सेंटर में बैठे वैज्ञानिकों का कमांड मिलते ही विक्रम लैंडर चांद की सतह की तरफ बढ़ना शुरू करेगा। लैंडर चांद की सतह से २५ किलोमीटर दूर से नीचे आना शुरू होगा। जैसे ही लैंडर विक्रम को आदेश मिलेगा वह १.६८ किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चांद की सतह पर बढ़ना शुरू करेगा। अगर इस रफ्तार को प्रतिघंटे की रफ्तार में बदलते हैं तो यह ६,०४८ किलोमीटर प्रतिघंटा की गति होगी। जो विमान की गति से १० गुना ज्यादा होगी। इस दौरान ही लैंडर विक्रम के सारे इंजन स्टार्ट रहेंगे और उसकी गति को धीमा करेंगे।

सबसे कठिन चरण
ये सबसे कठिन चरण होता है। इस दौरान लैंडर विक्रम अपने तकनीकी यंत्रों के जरिए हर आदेश का पालन करते हुए सीधे चांद की सतह की तरफ बढ़ेगा। इस दौरान वह हॉरिजांटल से लंबवत होगा, ये काफी नाजुक चरण होता है। चंद्रयान-२ मिशन के दौरान भी इसी फेज के दौरान विक्रम लैंडर व्रैâश कर गया था।

खोजेगा सुरक्षित ठिकाना
चांद की सतह से ८०० मीटर की ऊंचाई पर विक्रम लैंडर चक्कर लगाते हुए सतह पर अपने लिए सुरक्षित ठिकाना खोजेगा। लैंडर उतरते हुए चांद की सतह के करीब पहुंचेगा और यह चांद की सतह से १५० मीटर ऊपर आकर थोड़ा रुकेगा। इस दौरान वह चांद की सतह की तस्वीरें लेगा ताकि किसी प्रकार के खतरे से बचा जा सके और चांद पर उतरने के लिए सही जगह की तलाश पूरी हो जाए। सबकुछ जांचने के बाद लैंडर विक्रम चांद पर उतरने के लिए फाइनल टचडाउन की तैयारी शुरू करेगा। लैंडिंग के लिए अपने दो इंजनों के जरिए लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा। लैंडर के बेहद मजबूत पैर ३ मीटर प्रति सेकेंड (करीब १०.८ किलोमीटर प्रतिघंटे) के प्रभाव को सहने लायक बने होते हैं। यानी जो दबाव चांद के सतह पर उतरने के दौरान पड़ेगा, लैंडर के पैर उसे बड़े आराम से बर्दाश्त कर लेगा। सभी फैक्टर तय पैमाने पर होने पर ही सॉफ्ट लैंड करवाया जाएगा, अन्यथा २७ अगस्त को लैंडिंग होगी। निर्धारित समय से दो घंटा पूर्व शेड्यूल फाइनल होगा।

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