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३० साल पुराने रेप केस में २१५ अधिकारियों को सजा! …मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला रखा बरकरार 

सामना संवाददाता / चेन्नई 
एक ऐतिहासिक फैसले में मद्रास हाई कोर्ट ने ३० साल पुराने रेप केस मामले में २१५ अधिकारियों की सजा के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस मामले की सभी अपीलों को खारिज कर दिया। सत्र अदालत ने तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के एक आदिवासी गांव वाचथी में १९९२ में चंदन तस्करी संबंधी छापेमारी के दौरान यौन उत्पीड़न सहित अन्य अत्याचारों के लिए २१५ लोगों (सभी वन, पुलिस और राजस्व विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों) को दोषी ठहराया। जस्टिस पी. वेलमुरुगन ने अपने आदेश में कहा कि इस अदालत ने पाया है कि सभी पीड़ितों और अभियोजन पक्ष के गवाहों के साक्ष्य ठोस और सुसंगत हैं, जो विश्वसनीय हैं।’ उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्यों के माध्यम से अपना मामला साबित कर दिया है। २० जून, १९९२ को अधिकारियों ने तस्करी के चंदन की लकड़ी की तलाश में वाचथी गांव पर छापा मारा था। छापे के दौरान संपत्ति और पशुधन का व्यापक विनाश हुआ और १८ महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। २०११ में धर्मपुरी की एक सत्र अदालत ने मामले में १२६ वनकर्मियों को दोषी ठहराया था, जिनमें चार भारतीय वन सेवा अधिकारी, ८४ पुलिसकर्मी और पांच राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे। २६९ आरोपियों में से ५४ की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई और शेष २१५ को १ से १० साल तक जेल की सजा सुनाई गई थी। फैसले को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सत्र अदालत को सजा की शेष अवधि काटने के लिए सभी आरोपियों को तुरंत हिरासत में लेने का निर्देश दिया। जस्टिस वेलमुरुगन ने तमिलनाडु सरकार को यह भी आदेश दिया कि २०१६ में एक खंडपीठ के आदेश के अनुसार हर रेप सर्वाइवर को तुरंत १० लाख रुपए का मुआवजा जारी किया जाए और अपराध के लिए दोषी ठहराए गए पुरुषों से ५० प्रतिशत राशि वसूल की जाए। अदालत ने सरकार को आरोपियों को बचाने के लिए तत्कालीन जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला वन अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

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