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योगी के शहर में २७ थोक विक्रेता बेच रहे थे जहर! नशीली दवाओं के कारोबारियों की जब्त होगी संपत्ति

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

गोरखपुर जिले में नशे के कारोबार से २७ थोक विक्रेता जुड़े हैं, जो फेंसिडिल सिरप से लेकर साइकॉट्रॉपिक ड्रग बेच रहे हैं। इनमें दोनों दवा व्यापारी संगठन के दो नेता भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में ड्रग विभाग को यह जानकारी मिली है। नशीली दवाओं के मामले में नामजद गुप्ता बंधुओं अमित और आशीष गुप्ता की संपत्तियों को पुलिस जब्त करेगी। पुलिस जिले में एनडीपीएस की धारा के तहत दर्ज सभी मुकदमों का ब्यौरा तैयार कर रही है।
सूची तैयार होने के बाद अवैध तरीके से कमाई गई संपत्ति को पुलिस प्रशासन के सहयोग से जब्त करने की कार्रवाई होगी। नशीले पदार्थों जुड़े रैकेट का कमर तोड़ने के लिए इनकी संपत्ति को जब्त करने का फैसला लिया गया है। मालूम हो कि नशीली दवा के कारोबारी गुप्ता बंधुओं पर भी गीडा थाने में एनडीपीएस का केस दर्ज है और उनके नाम भी इस सूची में शामिल किए जाएंगे। पुलिस पूरा ब्यौरा जुटा रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर में पिछले कुछ सालों में दर्ज सभी मुकदमों के आरोपियों को इस सूची में शामिल कर कार्रवाई की जाएगी। पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई को सौंपी गई है, इसके बाद उन्होंने इस पर काम तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस के तहत दर्ज सभी मुकदमों के अभियुक्तों की बेनामी संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। सभी को कानून के तहत जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
ड्रग विभाग ने इस मामले में एबॉट कंपनी और उसके बनारस स्थित कैरी एंड फारवर्ड (सीएंडएफ) से पूरी जानकारी मांगी है। साथ ही तीन वर्ष का रिकॉर्ड मांगा है। इस रिकॉर्ड के जरिए यह पता चलेगा कि किस-किस थोक विक्रेता ने कितनी मात्रा में सिरप और अन्य साइकॉट्रॉपिक ड्रग मंगाए हैं। गोरखपुर में करीब सात हजार व्यापारी हैं। इसमें १,२०० थोक विक्रेता भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि एबॉट कंपनी से रिकॉर्ड मिलने के बाद सभी दवा व्यापारियों की जांच की जाएगी। क्योंकि शासन स्तर से प्रतिदिन की रिपोर्ट मांगी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जिले में दवा व्यापारियों के दो गुट हैं। दोनों से जुड़े कुछ व्यापारी नशीली दवाओं का कारोबार कर रहे हैं। एक नेता ने छह माह पहले ही एबॉट कंपनी से फेंसिडिल सिरप की खरीद-बिक्री शुरू की है। अब तक ८० हजार सिरप बेच चुके हैं। दूसरे संगठन के कुछ पदाधिकारी भी नशीली दवाओं से जुड़े हैं। वह एथिकल के साथ जेनेरिक दवाओं का भी कारोबार कर रहे हैं। यही कारण है कि इतना बड़ा मामला होने के बाद भी किसी संगठन से कोई टिप्पणी अब तक नहीं आई है।
दरअसल फेंसिडिल सिरप कोडीन से बनाई जाती है। इसे बनाने में अफीम का इस्तेमाल किया जाता है। यह दवा बंगाल से लेकर बांग्लादेश और पूवोेत्तर में अवैध रूप से भेजी जाती है। गोरखपुर में छह अगस्त को गीडा थाना क्षेत्र से दो करोड़ की नशीली दवाएं बरामद की गई थीं। विभाग को दो ट्रक में लदे सिरप फेंसिडिल मिले थे।
इस मामले में दस लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अब तक छह आरोपी गिरफ्तार किए गए। गुप्ता बंधु अब भी फरार हैं। दोनों पर २५-२५ हजार रुपए का इनाम घोषित किया जा चुका है। आगरा के दो व्यापारी भाई भी इस मामले में फरार हैं। इस संदर्भ में ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि एबॉट कंपनी से तीन साल की बिक्री का रिकॉर्ड मांगा गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि २७ थोक व्यापारी उस कंपनी से दवा मंगाते व बेचते हैं। इस मामले में शासन को प्रतिदिन की रिपोर्ट भेजी जा रही है। शासन बेहद सख्त है। नशीली दवा का काम करने वाले किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे।

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