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३० छात्रों को पिलाई शराब, उतरवाए कपड़े … रैगिंग करने वाले १० छात्रों को किया गया सस्पेंड 

• हैदराबाद के गांधी मेडिकल कॉलेज की शर्मनाक घटना

सामना संवाददाता / हैदराबाद 
हैदराबाद के तेलंगाना में स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज से रैगिंग की एक बेहद ही सन्न कर देनेवाली घटना सामने आई है। बताया जाता है कि मेडिकल के कुछ सीनियर छात्रों ने आधी रात को करीब ३० छात्रों को न केवल शराब पिलाई बल्कि उनके कपड़े भी उतरवाए। मामला सामने आने के बाद रैगिंग करने के आरोप में एमबीबीएस के १० छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद कॉलेज प्रबंधन ने इन छात्रों को एक साल के लिए सस्पेंड किया है।

एंटी रैगिंग सेल में भी की थी शिकायत
इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी पिछले कुछ दिनों से इस मामले में छात्रों पर लगे आरोपों की जांच कर रही थी। जांच में दोषी पाए गए छात्रा को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों की रैगिंग हुई थी उन्होंने, यूजीसी नई दिल्ली में एंटी रैगिंग सेल में भी शिकायत की थी, जिसके बाद मामले को तेलंगाना अधिकारियों के सामने उठाया गया था। छात्रों को कॉलेज से सस्पेंड किए जाने के साथ-साथ हॉस्टल से भी निकाल दिया गया है। निलंबन की अवधि पूरे होने के बाद कमेटी रिव्यू करेगी और उसके बाद ही उनको कॉलेज में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।
पहले भी सामने आ चुका है रैगिंग का मामला
बता दें कि पिछले साल तेलंगाना के बसारा कस्बे में स्थित आईआईआईटी संस्थान में भी रैगिंग का मामला सामने आया था। रैगिंग के आरोप में पांच छात्रों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था। जिस समय रैगिंग की घटना हुई थी उस समय पांच आरोपियों में से तीन नाबालिग थे और सभी इंटरमीडिएट के द्वितीय वर्ष के छात्र थे जबकि पीड़ित छात्र प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे।
गैरकानूनी है रैगिंग करना 
दरअसल, आज के समय में रैगिंग एक तरह का चलन हो गया है। कॉलेज में सीनियर अपने जूनियर के साथ रैगिंग करने लगते हैं जबकि यह गैरकानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। कई बार तो रैगिंग से पीड़ित छात्र सुसाइड भी कर लेते हैं। रैगिंग के बढ़ते मामलों के देखते हुए खुद सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक लगाने के लिए यूजीसी को निर्देश दे चुका है। १९९९ में सुप्रीम कोर्ट ने विश्व जागृति मिशन के तहत रैगिंग के लिए एक कानून को भी डिफाइन किया था।

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