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भारत में तंबाकू का त्रास हर दिन जाती हैं ३,५६२ जान!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

सार्वजनिक स्वास्थ्य समूहों ने की मंत्रालय से कर बढ़ाने की अपील

तंबाकू जानलेवा है, ऐसी चेतावनी तंबाकू के पैकेट्स पर लिखा रहता है। इसके बावजूद भारतीय नागरिक तंबाकू का प्रयोग करते हैं और कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों को दावत देते हैं। धीरे-धीरे तंबाकू एक महामारी के रूप में युवाओं से लेकर बुजुर्गों में फैलता जा रहा है। इस तंबाकू को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। संपूर्ण भारत तंबाकू का त्रास झेल रहा है। इसकी वजह से हर दिन करीब ३,५६२ लोगों की जान जा रही है।
देश के नागरिकों को तंबाकू जनित बीमारियों से बचाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य समूहों और चिकित्सकों ने एक रास्ता निकाला है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि २०२४-२५ के बजट में तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाया जाए। वित्त मंत्रालय से की गई अपील में उन्होंने सिगरेट, बीड़ी और धुआं रहित तंबाकू पर स्वास्थ्य कर बढ़ाने की मांग भी की है। टाटा मेमोरियल अस्पताल में वैंâसर सर्जन डॉ. पंकज चतुर्वेदी के मुताबिक, तंबाकू एक छिपी हुई महामारी है, जिससे हर साल १३ लाख भारतीयों की मौत हो रही है।

एक अध्ययन के मुताबिक, १० वर्षों में सिगरेट, बीड़ी और धुआं रहित तंबाकू उत्पाद तेजी से लोगों की पहुंच में आए हैं। भारत में तंबाकू उत्पादों पर कर डब्लयूएचओ की सिफारिशों से कम है। डब्ल्यूएचओ सभी तंबाकू उत्पादों पर कम से कम ७५ फीसदी कर की सिफारिश करता है, जबकि भारत में सिगरेट पर कुल कर भार ४९.३ फीसदी, बीड़ी पर २२ फीसदी और धुआं रहित तंबाकू पर ६३ फीसदी है।

किफायती और प्रभावी उपाय

कोविड जैसी महामारी से तीन वर्ष में करीब ५ लाख लोगों की जान गई थी। यह देश के हित में है कि तंबावूâ उत्पादों को युवाओं और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से दूर रखा जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्पाद शुल्क में वृद्धि तंबावूâ की खपत को नियंत्रित करने का किफायती और प्रभावी उपाय है। बता दें कि स्वास्थ्य पर संसद की स्थायी समिति ने हाल ही में वैंâसर देखभाल योजना और प्रबंधन पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें भारत में वैंâसर से संबंधित मौतों में तंबावूâ की प्रमुख भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। इन निष्कर्षों से चिंतित होकर, समिति ने सरकार को तंबावूâ पर कर बढ़ाने, अतिरिक्त राजस्व को वैंâसर की रोकथाम और जागरूकता की ओर निर्देशित करने की सिफारिश की।

भारत में ७० फीसदी रोगी

दुनिया में धुआंरहित तंबावूâ के सेवन से होने वाली मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले ७ साल में मौतों का आंकड़ा तीन गुना बढ़ा है। मौतों की संख्या ३ लाख पचास हजार हो गई है। यह आंकड़े यार्वâ यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक, दुनियाभर में धुआं रहित तंबावूâ के प्रयोग से होने वाली बीमारियों के ७० फीसदी रोगी भारत में हैं।

ई-सिगरेट की लत खतरनाक

कुछ लोग कहते हैं हम तो सिगरेट नहीं ई-सिगरेट पी रहे हैं और इसका बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। इस पर डॉ. सुशीला कटारिया का कहना है कि ई-सिगरेट में खासतौर पर एक लिक्विड होता है, जिसमें अक्सर निकोटिन के साथ दूसरे फ्लेवर होते हैं। हमें इसकी लत लग जाती है और पेâफड़े भी डैमेज होते हैं। इन दिनों यह कई फ्लेवर में उपलब्ध हैं, ऐसे में बच्चों में इसकी लत लगना सिगरेट से भी ज्यादा आसान है। ई-सिगरेट की आदत पड़ने के बाद सिगरेट और तंबावूâ की लत पड़ना काफी आसान हो जाता है, ऐसा कई शोध में भी सामने आया है।

 

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