मुख्यपृष्ठनए समाचार४.१४ करोड़ लोग होंगे शिकार!

४.१४ करोड़ लोग होंगे शिकार!

सामना संवाददाता / मुंबई

 देश में ५८.९ फीसदी है टाइप २ डायबिटीज में रूपांतरण की दर
 हिंदुस्थान में हुआ दुनिया का पहला ‘प्री-डायबिटीज से डायबिटीज’ सम्मेलन

इंपेयर्ड फास्टिंग द्वारा निश्चित किए जानेवाले प्री-डायबिटीज का वैश्विक प्रसार २०२१ में ५.८ फीसदी यानी २.९८ करोड़ था, जो २०४५ में बढ़कर ६.५ फीसदी यानी ४.१४ करोड़ तक बढ़ने का अनुमान है। आईसीएमआर और आईएनडीएवी के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, हिंदुस्थान में लगभग १५.४ फीसदी शहरी आबादी और १५.२ फीसदी ग्रामीण आबादी में प्री-डायबिटिक का कुल प्रसार १५.३ फीसदी है। प्रसिद्ध मधुमेह रोग विशेषज्ञ और मधुमेह अनुसंधान में अग्रणी पद्मश्री डॉ. वी. मोहन ने कहा कि प्री-डायबिटीज से टाइप २ डायबिटीज में रूपांतरण की खतरनाक दर यानी ५८.९ फीसदी दर है। उन्होंने कहा कि प्री-डायबिटीज को दूर करने के लिए सक्रिय जीवनशैली और उचित आहार पर ध्यान देना चाहिए।

लाइफ साइंस इंस्टीट्यूट ने ‘प्री-डायबिटीज टू डायबिटीज: द ट्रैजेक्टरी ऑफ कंसर्न’ विषय पर अंधेरी स्थिति कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें बताया गया कि प्री-डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें ब्लड ग्लूकोज स्तर में वृद्धि होती है। लेकिन यह टाइप-२ मधुमेह के रूप में परिभाषित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।

शोध में सामने आई चौंकानेवाली जानकारी 

डॉ. सुवर्णा पाटील ने ग्रामीण महाराष्ट्र में किए अध्ययन के निष्कर्षों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन में १६ से १८ आयु वर्ग की १,५२० किशोरियों को शामिल किया गया, जिसमें महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शोध में पाया गया कि दो फीसदी में प्री-हाइपरटेंशन और १२.७ फीसदी में कम एचडीएल पाया गया। इसी तरह ३९.४ फीसदी में प्री-डायबिटीज सामान्य तौर पर मिला। खराब आहार और उच्च कमर-कूल्हे का अनुपात ३.६ फीसदी देखा गया।

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