मुख्यपृष्ठनए समाचार४९ डेंजर जोन! प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी : खतरनाक जगहों...

४९ डेंजर जोन! प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी : खतरनाक जगहों पर रहते हैं ८७ हजार लोग

  • इन जगहों पर हो सकता है भूस्खलन
  • नागरिकों को घर खाली करने की दी गई नोटिस

सामना संवाददाता / ठाणे
ठाणे जिला पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा हुआ है। इस जिले की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से पहाड़ी इलाकों और उसके आसपास के इलाकों पर अवैध निर्माण किया गया है, जिसमें हजारों नागरिक रहते हैं। बरसात के मौसम में कोई गंभीर घटना न घटे इसलिए ठाणे जिला प्रशासन ने सर्वे के माध्यम से कुल ४९ जगहों को डेंजर जोन घोषित किया है। यहां लगभग ८७ हजार लोग रहते हैं। इन ४९ जगहों पर भूस्खलन होने की संभावना सबसे अधिक है। प्रशासन ने वहां अवैध रूप से रह रहे नागरिकों को नोटिस भेजकर घर खाली करने की हिदायत दी है।
बता दें कि ठाणे जिले में शहरीकरण तेजी से चल रहा है। आवासीय भवनों, उद्योगों, व्यवसायों, मेट्रो परियोजनाओं आदि ने जगह की कीमत बढ़ा दी है। जिले में कंक्रीट  की इमारतों के साथ ही अवैध निर्माण भी बढ़ा है। जहां हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रहते हैं। अतिक्रमण के कारण पहाड़ियों पर मिट्टी कमजोर हो जाती है और मानसून के दौरान भूस्खलन होने की संभावना होती है। ठाणे जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में मानसून के मौसम में भूस्खलन के कारण दुर्घटनाएं घट चुकी हैं और कई लोगों ने अपनी जान तक गवां दी है। मानसून पूर्व तैयारियों के तहत जिला प्रशासन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर उपाय करने में लगा हुआ है। इसी के तहत ठाणे जिला प्रशासन ने जिले के छह मनपा सहित नगरपालिका और ग्रामीण क्षेत्रों में ४९ स्थानों पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की सूची तैयार की है, जिसमें लगभग ८७ हजार, ९१२ नागरिक रहते हैं। जिला प्रशासन के अनुसार कुल ४९ जगहों में से १४ खतरनाक जगह ठाणे मनपा क्षेत्र में हैं। जिला प्रशासन के अनुसार शाहपुर तालुका में १० स्थानों और मुरबाड़ तालुका में मालशेज घाट पर भी भूस्खलन का खतरा है।

बचाव कार्य में मदद करेगा ड्रोन
आपदा से निपटने  के लिए मनपा तैयार
भूस्खलन क्षेत्रों में होगा उपयोग
मुंबई में आपात स्थिति के दौरान मनपा ड्रोन का उपयोग करने की तैयारी कर रही है। चट्टान खिसकने वाले क्षेत्रों सहित संवेदनशील इलाकों में आपदा से निबटने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति देने का प्रस्ताव वॉर्ड स्तर से लेकर आपात विभाग तक आया है। कहा गया है कि आपदा के समय बचाव कार्य में ड्रोन अहम भूमिका निभाएगा। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही ड्रोन के इस्तेमाल पर मंजूरी मिल सकती है।
ज्ञात हो कि कई बार चट्टान खिसकने वाले क्षेत्रों में बारिश के समय होनेवाली दुर्घटनाओं के चलते आपदा की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे निबटने के लिए रास्ता निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जबकि ऐसी स्थिति में राहत व बचाव कार्य को प्रथमिकता दिया जाना जरूरी होता है। हालांकि चट्टान खिसकने की घटना में कई बार सभी तंत्र मौके पर तो पहुंच जाते हैं, लेकिन घटनास्थल तक जानेवाले मार्ग अवरुद्ध होते हैं। जिसके चलते राहत व बचाव कार्य वहां पहुंचाना कठिन होता है।
सटीक जानकारी देगा
इस तरह की आपदा की स्थिति में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके माध्यम से दुर्घटनास्थल की सही स्थिति का पता चल सकेगा। इससे सही तरीके से मदद कार्य को अंजाम देना संभव होगा। यही इसके पीछे का मुख्य मकसद है। मनपा प्रशासन के मुताबिक शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग के लिए आपातकालीन विभाग से अनुमति मांगी गई है। प्रशासन के मुताबिक ड्रोन यह पता लगाने में सक्षम होंगे कि घटनास्थल पर क्या हुआ है। साथ ही घटनास्थल पर किस तरह की मदद की जरूरत है। इसलिए ड्रोन की मांग की गई है। कहा गया कि मनपा आयुक्त ने भी इसके लिए हरी झंडी दे दी है।
दमकल के माध्यम से मिलेंगे
बताया गया है कि ड्रोन के इस्तेमाल के लिए मुंबई पुलिस से भी अनुमति लेनी पड़ती है। इसलिए इस अनुमति के बाद ही ड्रोन का इस्तेमाल संभव होगा। मुंबई दमकल विभाग ड्रोन नीति पर फैसला कर एजेंसी की नियुक्ति करेगा। इसलिए इस काम में और समय लगने की संभावना है। इसलिए ड्रोन का उपयोग दमकल विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने पर ही वॉर्ड स्तर पर किया जा सकेगा।

अन्य समाचार

ऊप्स!