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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र पर राज्य का ६४५२ करोड़ का बकाया

सामना संवाददाता / मुंबई
समाज के आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के घरों के सपने को साकार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार की भागीदारी से प्रधानमंत्री आवास योजना क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना का डंका केंद्र सरकार जमकर पीट रही है, लेकिन राज्यों को अपने हिस्से का भुगतान नहीं कर रही है। महाराष्ट्र राज्य का हाल भी कुछ ऐसा ही है। इस योजना में केंद्र सरकार ने अपने हिस्से की ६,४५२ करोड़ रुपए महाराष्ट्र सरकार को नहीं दिए हैं, जिससे यहां इस योजना की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है और आम लोगों के घर का सपना ‘टूटने’ का डर मंडराने लगा है।
‘सभी के लिए आवास’ के उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने जून २०१५ में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की। यह योजना राज्य के आवास विभाग द्वारा राज्य के ३१७ शहरों में लागू की जाती है और स्थानीय नगर निकायों के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग या मध्यम आय वर्ग के लिए है। कर्ज से जुड़े ब्याज सब्सिडी के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए किफायती आवास बनाया जाता है। इन मकानों का निर्माण निजी भागीदारी के माध्यम से किया जाता है।
लगभग ८ लाख आवास को मंजूरी
इस योजना के लिए प्रति लाभार्थी को राज्य सरकार से हिस्से से एक लाख रुपए, केंद्र सरकार की ओर से डेढ़ लाख रुपए सब्सिडी दी जाती है। केंद्रीय अनुमोदन और नियंत्रण समिति (सीएसएमसी) ने अब तक १ हजार ६४२ परियोजनाओं में से ८८० हजार ८१७ को मंजूरी दी है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के लिए किफायती मकानों के निर्माण के अंतर्गत ६ लाख २५ हजार ०५० परिवारों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल १५ लाख ५ हजार ८६७ मकान स्वीकृत हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लगभग ८ लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से ६ लाख २७ हजार ५८१ मकानों को केंद्र के हिस्से की रकम मिलेगी। आवास विभाग के सूत्रों ने बताया कि शेष ६ हजार ४५२ करोड़ २० लाख रुपए की धनराशि केंद्र सरकार से मिलनी बाकी है।

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