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सूखे की चपेट में ७३ प्रतिशत महाराष्ट्र! … सरकार कर रही है अनदेखी … शरद पवार का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में सूखे की स्थिति गंभीर है। राज्य के कुल १९ जिलों की ४० तहसील गंभीर सूखे की चपेट में हैं, जबकि १६ तहसीलों में मध्यम सूखा है। कुल मिलाकर महाराष्ट्र का ७३ प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में है। अगर महाराष्ट्र में जून के अंत तक यही स्थिति बनी रही तो राज्य में सूखे की स्थिति भयावह होने की आशंका है। फिलहाल राज्य में लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं। सराकर राज्य में सूखे की स्थिति को अनदेखा कर रही है। इस तरह का हमला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने बोला।
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार कल मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिंदे भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। शरद पवार ने कहा कि राज्य भीषण सूखे से जूझ रहा है। पेयजल की आपूर्ति मांग से कम होने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। महाराष्ट्र में कुल २ हजार ९२ मंडल हैं, जिनमें से राज्य के पंद्रह सौ मंडलों में सूखा घोषित किया गया है। खासकर मराठवाड़ा और पुणे के कुछ हिस्सों में स्थिति गंभीर है। शरद पवार ने यह भी कहा कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र में सबसे अधिक जलाशय हैं। इसके बावजूद जल भंडारण के मामले में यहां गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
…राज्य में गंभीर हो सकती है पानी की समस्या
शरद पवार ने कहा कि मराठवाड़ा में ४० महत्वपूर्ण जलाशय हैं, लेकिन इनमें केवल १६ प्रतिशत ही पानी शेष बचा है। मराठवाड़ा के कई जिलों में स्थिति एक समान है। छत्रपति संभाजीनगर में ८१ छोटी परियोजनाएं हैं। ऐसे में जहां केवल छह प्रतिशत पानी ही बचा है। इसी तरह पुणे में पचास परियोजनाएं हैं। केवल २४ प्रतिशत पानी बचा है। इस पर विस्तार से बताते हुए शरद पवार ने कहा कि मराठवाड़ा में जायकवाड़ी परियोजना में केवल ५.५० प्रतिशत जल, जबकि कई जलाशयों में शून्य प्रतिशत जल भंडारण बचा है। राज्य के धाराशिव, छत्रपति संभाजीनगर, नगर की बड़ी परियोजनाओं में पांच फीसदी से भी कम जल भंडारण बचा है। शरद पवार ने यह भी कहा कि जून के अंत तक राज्य में यही स्थिति रहने की संभावना है। इसलिए पानी की समस्या बहुत गंभीर हो सकती है।
कृषि मंत्री ही बैठक से रहे नदारद
शरद पवार ने कहा कि कृषि मंत्री के जिले को सूखा जिले के रूप में जाना जाता है। लेकिन कल मुख्यमंत्री द्वारा सूखा आयोजित बैठक में खुद कृषि मंत्री नदारद रहे, जो गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार में केवल दो पालकमंत्री ही मुख्यमंत्री की बैठक के शामिल हो रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। शरद पवार ने कहा कि हम मीडिया के जरिए राज्य सरकार से जागने की अपील कर रहे हैं। इसके बावजूद अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो हमारे पास अन्य विकल्प हैं।
जलाशयों में घटा जलस्तर
शरद पवार ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर, उत्तर महाराष्ट्र, पुणे विभाग में स्थिति चिंताजनक है। बड़े जलाशयों में शामिल संभाजीनगर के जलाशयों में १० प्रतिशत पानी है। इसी तरह पुणे विभाग के जलाशयों में ३५ फीसदी, नासिक के जलाशयों में २२ फीसदी पानी रह गया है। टैंकरों से हो रही जलापूर्ति
राज्य में इस साल १०,५७२ टैंकरों का इस्तेमाल जलापूर्ति के लिए किया जा रहा है, जबकि पिछले साल भी १,१०८ टैंकरों का इस्तेमाल जलापूर्ति के लिए किया गया था।

सूखे की बैठक मराठवाड़ा के
मंत्री गायब!- नाना पटोले
राज्य में सूखे की स्थिति बहुत गंभीर है। कुछ गांवों में महीनों से पानी नहीं मिल रहा है। जानवरों के लिए चारा और पीने का पानी नहीं है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने छत्रपति संभाजीनगर में सूखे की समीक्षा बैठक की। लेकिन इस बैठक से पांच पालकमंत्री अनुपस्थित रहे, जिससे पता चलता है कि सरकार सूखे को लेकर गंभीर नहीं है। मुख्यमंत्री को मौके पर ही आदेश देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सिर्फ बैठक की खानापूर्ति की। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने इसको लेकर ईडी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार आचार संहिता का बहाना बनाकर टाल-मटोल न करे, बल्कि जानवरों को चारा, पीने का पानी और लोगों के हाथों में काम तुरंत उपलब्ध कराए।
नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए नाना पटोले ने आगे कहा कि राज्य की मौजूदा सरकार असंवैधानिक है। इस सरकार को आम लोगों से कोई लेना-देना नहीं है। गरीब लोगों की जान जा रही है, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। सूखे से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। फिर भी सरकार कोई उपाय नहीं कर रही है। पुणे में एक धनाढ्य के बेटे ने दो गरीबों को कुचल दिया, जबकि निबंध लिखकर उसे छोड़ दिया गया।

चुनाव हुआ खत्म, अब जनता के
सवालों पर दें ध्यान – विजय वडेट्टीवार
राज्य में एक तरफ बेमौसम बारिश और दूसरी तरफ सूखा है। इसे लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार की जमकर खिंचाई की है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वडेट्टीवार ने कहा कि पूरा राज्य सूखे से जूझ रहा है। पानी की भारी कमी है इसलिए किसानों और आम जनता दोनों को परेशानी हो रही है। जिन स्थानों पर बेमौसम बारिश हुई है, वहां अभी तक पंचनामा नहीं किया गया है, इसलिए राज्य सरकार को तुरंत पंचनामा कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार को सूखाग्रस्त इलाकों में चारा शिविर और पीने के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए।

 

 

 

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