मुख्यपृष्ठनए समाचार६ वर्षों में ७,५१६ महिलाओं की मौत ...प्रसव का ‘वेदनादायी’ सच!

६ वर्षों में ७,५१६ महिलाओं की मौत …प्रसव का ‘वेदनादायी’ सच!

पश्चिम महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा १८ फीसदी मौतें
सामना संवाददाता / मुंबई
सरकार दावा करती है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद २०१७ से २०२२ तक छह वर्षों की अवधि में प्रसव के दौरान ७,५१६ महिलाओं की मौत हो चुकी है। प्रसव की यह ‘वेदनादायी’ जानकारी खुद राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक लिखित जवाब में दी गई है। इनमें से सबसे ज्यादा १८ फीसदी मौतें पश्चिम महाराष्ट्र में हुई हैं।
सरकार चला रही है योजनाएं
सरकार की ओर से लिखित जवाब में बताया गया है कि प्रसव के दौरान महिलाओं की होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार योजनाएं चला रही है। सरकार द्वारा ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में संस्थागत (मेडिकल) प्रसव को बढ़ावा देने के कारण घरेलू प्रसव की संख्या में कमी आई है। एनिमिया और खून की कमी से प्रभावित गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आयरन की गोलियां दी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें इंजेक्शन दिया जाता है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इनके सहयोग के लिए आशा कार्यकर्ताओं को १००० रुपये प्रति गर्भवती महिला के पीछे दिया जाता है। इसके लिए सरकार जननी सुरक्षा योजना, मातृत्व अनुदान योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को जोर शोर से चला रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से नियमित जांच, मुफ्त सोनोग्राफी आदि उपलब्ध कराया जाता है।

विधान परिषद में उठा मुद्दा
राज्य में प्रसव के दौरान होने वाली मौतों को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक विलास पोतनिस ने विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान सवाल उपस्थित किया था और पूछा कि सरकार इस संबंध में क्या कदम उठाएगी? विधायक ने कहा कि ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों में आज भी घरेलू प्रसव को प्राथमिकता दी जाती है और एनीमिया, रक्त की कमी, अत्याधिक रक्तस्राव, प्रसव के तुरंत बाद संक्रमण, एंबुलेंस सुविधाओं की कमी, स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने में देरी आदि के कारण प्रसव के दौरान महिलाओं की मौतें होती हैं। पोतनिस ने सवाल उठाया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्नत चिकित्सा और प्रौद्योगिकी की गति बढ़ने के बाद यह बात सामने आई है कि वास्तव में प्रसव के दौरान होनेवाली मौतों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। विलास पोतनिस ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या ये मौतें इसलिए हो रही हैं क्योंकि राज्य में कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही हैं?

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