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कोस्टल रोड का काम ८० प्रतिशत पूरा … अब अड़ंगा क्यों डालते हो? … हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

• उसके मांर्ग की संरचना को अब बदलना संभव नहीं
• मनपा के प्रतिज्ञा पत्र में दावा
सामना संवाददाता / मुंबई
उच्च न्यायालय ने बुधवार को महत्वाकांक्षी कोस्टल रोड परियोजना की डिजाइन को बदलने की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कोस्टल रोड का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम ८० फीसदी पूरा हो चुका है। जल्द ही यह परियोजना मुंबईकरों की सेवा में शामिल हो जाएगी, ऐसे में कोर्ट ने याचिकाकर्ता की बात सुनी और पूछा कि क्यों अनुचित मांग कर प्रोजेक्ट के काम में अड़ंगा पैदा किया जा रहा है? मनपा ने एक हलफनामे में दावा किया कि यह परियोजना पूर्णता के चरण में है। ऐसे में कोस्टल रोड परियोजना की डिजाइन को बदलना संभव नहीं है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई २७ सितंबर को तय की है।
दक्षिण मुंबई में कोस्टल रोड परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। आर्किटेक्ट एलन अब्राहम ने एक जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि निकट भविष्य में मुंबईकरों की यात्रा को और अधिक आरामदायक और तेज बनाने के लिए इस परियोजना की डिजाइन को बदला जाए। याचिका पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रोजेक्ट में मूलभूत परिवर्तन किए बिना इसे अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने तर्क दिया कि मनपा प्रशासन को कोस्टल रोड की डिजाइन को बदलने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने विभिन्न मांगों पर विचार करने के लिए शहरी नियोजन के क्षेत्र में हाइवे के इंजीनियरों और विशेषज्ञों की एक समिति नियुक्त करने की मांग भी पीठ से की। मनपा की ओर से वरिष्ठ वकील एसपी चिनॉय और वकील जी. एल. कार्लोस ने उक्त याचिका के प्रति आपत्ति जताई। कोस्टल रोड का काम ८० प्रतिशत पूरा हो चुका है। वरिष्ठ अधिवक्ता चिनॉय ने तर्क दिया कि जो काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है, उसे संशोधित करना संभव नहीं है। इस संबंध में उन्होंने एक हलफनामा भी दाखिल किया।
मनपा का हलफनामा
मनपा के कोस्टल रोड परियोजना का ८० प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अब परियोजना के किसी भी हिस्से की डिजाइन, लेआउट में कोई बदलाव करना संभव नहीं है। हलफनामे में कहा गया है कि अब किसी भी बदलाव से लागत में वृद्धि और समय खर्च होगा। घुमावदार सड़कों वाले तट पर कोस्टल रोड परियोजना के हलफनामे में मनपा ने दावा किया है कि मूलरूप से इस सड़क की डिजाइन और संपूर्ण निर्माण विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन पर आधारित है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या आपको परियोजना की वैधता पर आपत्ति है? वास्तव में आपको संदेह क्या है? क्या आपको प्रोजेक्ट की डिजाइन पसंद नहीं है? क्या आप उम्मीद करते हैं कि अदालत परियोजना से संबंधित तकनीकी मुद्दों पर भी विचार करेगी? ऐसे सवालों के साथ चीफ जस्टिस उपाध्याय ने याचिकाकर्ता को तलब किया। याचिकाकर्ता को अपना बयान पेश करने का निर्देश दिया गया।

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