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सर्वाइकल कैंसर से हो रही है १ घंटे में ९ की मौत! …हिंदुस्थान में हर साल १.२० लाख महिलाओं को बना रहा शिकार 

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
वैश्विक सर्वाइकल कैंसर के लगभग ८५ फीसदी मामले कम विकसित देशों से सामने आते हैं। इससे हिंदुस्थान भी अछूता नहीं है। देश में हर साल करीब १.२० लाख महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर शिकार बना रहा है। इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने के बाद हिंदुस्थान में हर घंटे २१५, जबकि एक मिनट में नौ महिलाओं की मौत हो रही है, जो दुनिया में सर्वाइकल कैंसर से होनेवाली कुल मौतों का १५.२ फीसदी है। विशेषज्ञों की मानें तो इस जानलेवा बीमारी को केवल एचपीवी टीकाकरण और स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने जैसे प्रभावी रोकथाम की रणनीतियों से कम किया जा सकता है।
फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ऋषिकेश पई ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की जटिलताओं को समझने के साथ ही एचपीवी संक्रमण की जांच, टीकाकरण और इसके मामलों का प्रबंधन जरूरी हो गया है। ९ वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियों से लेकर ४५ वर्ष तक की महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर होने पर टीकाकरण के माध्यम से कंट्रोल किया जा सकता है। एफओजीएसआई की महासचिव डॉ. माधुरी पटेल ने कहा कि एचपीवी कॉन्क्लेव ने सभी स्त्री रोग विशेषज्ञों को एचपीवी की दुनिया में गहराई से जाने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। इसमें स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक टूल में अपडेट, एचपीवी केस प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रोगी के परिणामों को बढ़ाने के लिए अन्य उपकरणों के साथ ही एचपीवी के एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया। उल्लेखनीय है कि स्त्री रोग ऑन्कोलॉजी और एचपीवी कॉन्क्लेव में एफओजीसीआई राष्ट्रीय सम्मेलन ठाणे क्लब में आयोजित किया गया था, जिसमें हिंदुस्थान से १६ से अधिक राज्यों से लगभग ३०० स्त्री रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

सर्वाइकल कैंसर का कारण
सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस होता है। बता दें कि एचपीवी बहुत ही आम समस्या है। यह आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार यह सर्विक्स के सेल्स में बड़ा बदलाव कर देता है, जिसके कारण सर्वाइकल कैंसर में परिवर्तित होने लगता है। यह प्रक्रिया बहुत ही धीमी है और एचपीवी की वजह से सर्वाइकल कैंसर परिवर्तित होने में ५ से २० वर्षों का समय लग सकता है।
ऐसे होती है जांच
सर्वाइकल स्क्रीनिंग में सैंपल लेकर हाई रिस्क एचपीवी की जांच की जाती है। अगर वायरस पाया जाता है तो फिर सैंपल लेकर जांच की जाती है कि यह सर्विक्स के सेल्स में कोई बदलाव कर रहा है या नहीं। अगर सर्विक्स के सेल्स में किसी तरह का बदलाव नजर नहीं आता है तो महिला को एक साल के भीतर फिर से सर्वाइकल स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाता है, ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि एचपीवी खत्म हो गया है। अगर महिला के सर्विक्स में एचपीवी पाया जाता है और सेल्स में भी बदलाव दिखता है तो कोल्पोस्कोपी की जाती है। कोल्पोस्कोपी के लिए माइक्रोस्कोप के जरिए सर्विक्स को करीब से देखकर सर्वाइकल कैंसर के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई जाती है।

१०,००० स्त्री रोग विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
डॉ. प्रिया गणेश कुमार ने कहा कि एचपीवी पर `ट्रेन द ट्रेनर’ कार्यक्रम, अमेरिकन कैंसर सोसायटी और इंडियन कैंसर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में शुरू एचपीवी टीकाकरण परियोजना का एक हिस्सा है। इसके तहत विशेषज्ञों के नेतृत्व में चर्चा, प्रशिक्षण रणनीतियां और १२५ चुनिंदा स्त्री रोग विशेषज्ञों को व्यावहारिक कार्यशाला का अनुभव साझा किया गया है। इस एचपीवी कॉन्क्लेव के बाद ये प्रशिक्षक अपने १०,००० स्त्री रोग विशेषज्ञ सहयोगियों को टीकाकरण के माध्यम गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के बारे में ज्ञान प्रदान करेंगे। इसके साथ ही सर्वाइकल कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। स्क्रीनिंग और टीकाकरण के साथ-साथ समय पर बीमारी का पता चलने से इस कैंसर को रोका जा सकता है।

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