सामना संवाददाता / मुंबई
`पुणे शहर सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है। कई बड़ी और नामी कंपनियां पुणे में निवेश करने को उत्सुक हैं, परंतु औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती `दादागीरी’ विकास में एक बड़ी बाधा है,’ यह बात खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकार की है। इससे स्पष्ट है कि गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री ने इस `दादागीरी’ पर अप्रत्यक्ष रूप से अजीत पवार पर तंज कसा है। मुख्यमंत्री ने `पुणे महानगर क्षेत्र विकास केंद्र’ के उद्घाटन के अवसर पर उक्त बातें कहीं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पुणे के कुछ उद्योग `दादागीरी’ से तंग आकर दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। पुणे के उद्योगों में राजनीतिक `दादागीरी’ देखने को मिल रही है। विभिन्न दलों की यह `दादागीरी’ राजनैतिक पार्टी के नाम पर की जा रही हैं। मैं इस `दादागीरी’ को जरूर खत्म करूंगा। जो भी इसमें हमारी मदद करेगा, उसका हम स्वागत करेंगे। हम महाराष्ट्र में कहीं भी `दादागीरी’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुणे पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण एसपी को साफ निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी भी पार्टी के लोग उद्योगों को परेशान कर रहे हैं तो उनके खिलाफ मामला दर्ज करें। अगर तीन-चार बार मामला दर्ज करने के बाद भी वे नहीं सुधर रहे हैं तो उन पर मकोका लगाया जाए।
बता दें कि पुणे को पूर्व का `ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता है। यहां उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान होने के नाते, यह कुशल जनशक्ति तैयार करता है। लेकिन निवेशकों पर दबाव डाला जा रहा है कि `हमारे लोगों को काम पर रखो, हमें ठेके दो, हम जो कहेंगे, उसी दर पर काम करेंगे’, यह `दादागीरी’ पुणे में चल रही है। अगर निवेशकों को इस तरह के दबाव में काम करना पड़ेगा तो वे काम नहीं कर पाएंगे, ऐसा भी मुख्यमंत्री ने कहा।
