मुख्यपृष्ठनए समाचारयूपी के ४२ जिलों में मंडराया ऊर्जा विभाग पर निजीकरण का खतरा

यूपी के ४२ जिलों में मंडराया ऊर्जा विभाग पर निजीकरण का खतरा

-विभाग ने कसी कमर

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के ४२ जिलों के निजीकरण मामले में ऊर्जा विभाग निजीकरण प्रस्ताव को लेकर विद्युत नियामक आयोग जाने की तैयारी में है। इसके लिए विभाग ने पुख्ता रणनीति तैयार की है। दूसरी तरफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद भी नियामक आयोग पहुंचेगा। परिषद विधिक प्रस्ताव दाखिल करके निजीकरण प्रस्ताव रद्द करने की मांग करेगा।
पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल के निजीकरण से जुड़े मामले में विद्युत नियामक आयोग तमाम तरह की कमियां निकाल चुका है। ऊर्जा विभाग इन कमियों को दूर करके नए सिर से नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि विभाग की टीम नियामक आयोग पहुंचेगी और आयोग अध्यक्ष को कमियां दूर करने के मसले में संतुष्ट करने की कोशिश करेगी।
विभाग की रणनीति है कि उसके मसौदे पर नियामक आयोग की मुहर लग जाए तो आगे की कार्यवाही शुरू की जाए। इसकी भनक लगते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी अपनी तैयारी कर ली है। आयोग में विधिक आपत्ति देते हुए परिषद मांग करेगा कि निजीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज अभी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में इन आंकड़ों के आधार पर निजीकरण प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दी जा सकती है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा पिछले ५ वर्षों में जो भी बिजली दर आदेश जारी किया गया है, उसके खिलाफ बिजली कंपनियों व पॉवर कॉरपोरेशन ने अपीलेट ट्रिब्यूनल में मुकदमा लगा रखा है।

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