मुख्यपृष्ठटॉप समाचार`घाती' सरकार को झटका : लोकायुक्त कोर्ट पहुंचा २६३ करोड़ का `स्ट्रीट...

`घाती’ सरकार को झटका : लोकायुक्त कोर्ट पहुंचा २६३ करोड़ का `स्ट्रीट फर्नीचर’ घोटाला …आदित्य ठाकरे के फॉलोअप को मिली बड़ी सफलता

फरवरी में सुनवाई, घोटालेबाजों का होगा भंडाफोड़
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा में हुए २६३ करोड़ रुपए के स्ट्रीट फर्नीचर घोटाले की सुनवाई अब फरवरी में लोकायुक्त के पास होगी। इस सुनवाई के कारण `घाती’ सरकार के आशीर्वाद से हुए घपलों में शामिल घोटालेबाजों का भंडाफोड़ होगा। इसे लेकर आदित्य ठाकरे ने दो सप्ताह पहले लोकायुक्त को पत्र देकर घोटाले की जानकारी दी थी। इस बीच इस जांच के लिए मनपा आयुक्त प्रशासक को खुद मौजूद रहकर उपस्थित किए गए सवालों का उत्तर देना चाहिए। इस तरह की चुनौती ही कल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने मनपा को दी।
मनपा के `स्ट्रीट फर्नीचर घोटाले’ को लेकर आदित्य ठाकरे ने आयुक्त को कई बार पत्र देकर घोटाले की जानकारी देने, जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि, इसे लेकर मनपा आयुक्त की तरफ से कोई भी प्रतिसाद नहीं दिया जा रहा था। मानसूनी अधिवेशन में एक विधायक की तरफ से स्ट्रीट फर्नीचर घोटाले का ठेका रद्द होने की घोषणा भी की गई थी, वहीं असंवैधानिक मुख्यमंत्री ने इस संबंध में जांच कराए जाने की घोषणा की थी। मनपा आयुक्त की तरफ से घातियों के दबाव में कोई भी जांच करने में टाल-मटोल की जा रही थी। इसलिए लोकायुक्त के पास शिकायत की थी। इस तरह की जानकारी आदित्य ठाकरे ने `मातोश्री’ निवास-स्थान पर आयोजित पत्रकार परिषद में दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सुनवाई के लिए लोकायुक्त ने नगर विकास सचिव, मनपा आयुक्त प्रशासक और हमें बुलाया है। उन्होंने कहा कि इस सुनवाई में स्ट्रीट फर्नीचर घोटाले की सविस्तार जानकारी हम लोकायुक्त को देंगे।
इन सवालों का दो जवाब
स्ट्रीट फर्नीचर घोटाले की जांच का क्या हुआ?
ठेका रद्द हुआ तो वो रुका क्या?
कॉन्ट्रैक्टर ट्रैक्टर को दिए गए २५ करोड़ रुपए का क्या हुआ?
२५ करोड़ क्यों दिए? वह काम हुआ क्या?

देश में चल रहा मुगलकालीन अत्याचार
देश में सरकार के गलत फैसले पर सवाल उठानेवाले सांसदों को निलंबित कर दिया जाता है। बेरोजगारी, जल रहा मणिपुर को लेकर सवाल पूछने के लिए दो युवा अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षा में सेंध लगाते हैं। उन्होंने यह सवाल उठाते हुए कि क्या इसके लिए सरकार को जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में ब्रिटिशकाल से भी ज्यादा मुगलकालीन अत्याचार चल रहा है। सरकार को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। अन्यथा असंतोष का विस्फोट हो सकता है।
दिल्लीश्वरों के आदेश पर सूरत, अमदाबाद द्वारा मुंबई को लूटा जा रहा है
मौजूदा असंवैधानिक मुख्यमंत्री भाजपा द्वारा दी गई स्क्रिप्ट के अनुसार बोल रहे हैं। उनके पास हमारे उठाए गए सवालों का जवाब नहीं होता है। नया कुछ नहीं बोलते, क्योंकि उनकी वैâपेसिटी भी उतनी ही है। भाजपा भी यह बात जानती है इसलिए वे बार-बार हम पर आरोप लगा रहे हैं, इस तरह का तंज उन्होंने मुख्यमंत्री पर कसा। आदित्य ठाकरे ने कहा कि किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी, महाराष्ट्र से गुजरात में जानेवाले उद्योगों को लेकर वे नहीं बोल रहे। क्योंकि दिल्लीश्वरों के आदेश पर उन्हें सूरत, अमदाबाद से मुंबई-महाराष्ट्र को लूटना है। हालांकि, हम यह लूट नहीं होने देंगे। २५ दिसंबर को `गुड गवर्नेंस दिन’ मनाया जाएगा। फिलहाल, इस समय राज्य में `गुड गवर्नेंस’ छोड़िए गवर्नेंस भी बचा है क्या, इस तरह का सवाल भी आदित्य ठाकरे ने किया।
सवा छह सौ करोड़ का सड़क घोटाला
मुंबई की सभी सड़कों का एक साथ कंक्रीटीकरण करनेवाली अयोग्य नीति असंवैधानिक मुख्यमंत्री के आदेश पर शुरू करने की साजिश मनपा प्रशासन ने की लेकिन यह नीति अब पूरी तरह से फंस गई है। इस काम के लिए दिए गए ठेके में सवा छह सौ करोड़ रुपए का घोटाला होने की बात मैं १५ जनवरी २०२३ से कह रहा हूं। मनपा को भी आखिरकार इसे मानना पड़ा है। इसीलिए ही ४०० करोड़ के वेरिएशन पीछे लेना पड़ा। सवा छह करोड़ का एडवांस भी वापस लेना पड़ा। इसलिए हमने मुंबईकरों के अधिकार वाला सवा छह सौ करोड़ रुपयों को बचाया। इस तरह की जानकारी आदित्य ठाकरे ने पत्रकार परिषद में दी।
मुख्यमंत्री के कारण सड़क का काम ठप
घोटाले के कारण दक्षिण मुंबई में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करना पड़ा है। अब वह कॉन्ट्रैक्टर कोर्ट में गया है। प्रशासक ने कहा था कि २१ दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी करेंगे। उसके बाद नए ठेके में ३०० करोड़ रुपए कम वैâसे पड़े। इसे लेकर हमने प्रशासक से पूछा था, लेकिन इस बारे में जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालयीन स्टे के कारण ११ जनवरी तक टेंडर आगे नहीं बढ़ेगा। इसलिए सड़क का काम ठप पड़ गया है।
प्रशासन द्वारा बताई गई ५० सड़कें भी पूरी नहीं हो पाई हैं, ऐसा इतिहास में पहली बार हो रहा है। साल भर से सड़क का काम ठप है। इसके लिए पूरी तरह से असंवैधानिक मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। हिम्मत है तो प्रशासक खुद हमें वॉर्ड स्तर पर कितनी सड़कें शुरू हैं, इसकी जानकारी दें। उन्होंने प्रशासकों को चुनौती दी कि हम मीडिया के साथ मिलकर यह निरीक्षण करेंगे। उन्होंने यह भी मजाक उड़ाया कि उनमें यह साहस नहीं है।
इन कामों का लोकार्पण क्यों रोका?
महाविकास आघाड़ी के दौरान मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक रोड का ८३ प्रतिशत काम पूरा हुआ था। फिर डेढ़ साल में १५ फीसदी काम क्यों नहीं पूरा हुआ। यह प्रोजेक्ट अब तक लॉन्च क्यों नहीं हुआ? एमएमआरडीए का कहना है कि केवल ५ प्रतिशत काम बाकी है, तो किस वीआईपी के समय के लिए लोकार्पण लटकाए हुए हैं?
नई मुंबई मेट्रो लाइन का काम पांच महीने से तैयार है फिर भी लोकार्पण क्यों नहीं हुआ? शिवसेना नेता सांसद राजन विचारे के फॉलोअप से तैयार हुए दीघा स्टेशन के उद्घाटन में आठ महीने की देरी क्यों हुई? उरण लाइन क्यों रुकी हुई है? डोंबिवली मानकोली कनेक्टर तैयार होने के बावजूद लोकार्पण के लिए क्यों लटका है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर मुख्यमंत्री के पास अपने ही जिले के कार्यों का लोकार्पण करने का समय नहीं है तो वह राज्य वैâसे संभालेंगे।
एमटीएचएलआर, सौंदर्यीकरण घोटाला भी निकालेंगे बाहर
सात सालों से चल रहे मुंबई ट्रांस हार्बर का काम अभी तक पूरा क्यों नहीं हुआ। इस अवधि में किसके पास एमएसआरडीसी था। टेंडर क्यों चेंज हुआ? इस बारे में कई शिकायतें आई हैं। सबूत के तौर पर दस्तावेज भी आ गए हैं। आदित्य ठाकरे ने यह भी चेतावनी दी कि सही समय पर इस घोटाले को बाहर निकालेंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि मुंबई के सौंदर्यीकरण में हुए १,७०० करोड़ रुपए के घोटाले को सामने लाएंगे।
अयोध्या में जाने के लिए आमंत्रण की जरूरत नहीं!
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण साल २०१९ में मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। राम मंदिर के लिए हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे, आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ने मांग की थी, लेकिन जिनका मंदिर से कोई संबंध नहीं था, अब वे मंदिर का क्रेडिट ले रहे हैं। इस तरह का तंज उन्होंने भाजपा पर कसा। उन्होंने कहा कि हमें अयोध्या में जाने के लिए आमंत्रण की जरूरत नहीं है।

अन्य समाचार