मुख्यपृष्ठनए समाचारएक कुर्सी दस दावेदार!...  जारी है राजस्थान का रण

एक कुर्सी दस दावेदार!…  जारी है राजस्थान का रण

– वसुंधरा राजे को मनाना हो रहा है मुश्किल

– चौथे दिन भी फंसा रहा सीएम पद का पेंच

– मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मामला भी नहीं सुलझा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आए ५ दिन होने को आए पर भाजपा अभी तक सीएम का चेहरा तय नहीं कर पाई है। सबसे बुरी दशा राजस्थान की है जहां एक कुर्सी के लिए १० दावेदार मौजूद हैं। लेकिन वसुंधरा राजे मान नहीं रही हैं और यहीं पेंच फंसा हुआ है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है। बता दें कि सबसे ज्यादा अनुशासित पार्टी होने का दावा करनेवाली भाजपा के भीतरखाने में सीएम पद के लिए घमासान मचा हुआ है। अभी तक न तो मुख्यमंत्री तय हो पाया है और ना ही विधायक दल की बैठक हो पाई है। यह स्थिति तब है जबकि भाजपा को राजस्थान समेत तीन राज्यों में स्पष्ट बहुमत मिला है। दावा किया जा रहा है कि भाजपा में सीएम पद के लिए ८ से १० नेता दावेदारी कर रहे हैं। आनेवाले लोकसभा चुनाव और अनुभव को देखते हुए सीएम पद का नाम तय करने में देरी हो रही है। सीएम पद का दावेदार तय होने में अभी १-२ दिन और लगने की संभावना है। अभी तो विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक भी नहीं लगाए हैं। वैसे पार्टी सूत्रों का दावा है कि राजस्थान में मुख्यंमंत्री के रूप में नया चेहरा ही दिया जाएगा।
उधर मीडिया में भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर पिछले ५ दिन से लगातार शब्दों की जुगाली चल रही है। मुख्यमंत्री के विभिन्न चेहरों को लेकर तमाम तरह के समीकरण समझाए जा रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस सवाल का ठोस जवाब किसी के पास नहीं है। कुछ चैनल जहां पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर, राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव, गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम सामने ला रहे हैं, वहीं नए चेहरों में दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, बाबा बालकनाथ और प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी के नाम उछाले जा रहे हैं। इनमें से कोई भी मुख्यमंत्री बनता है तो चैनल चिल्ला-चिल्लाकर बताएंगे कि उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी। इसी तरह मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वैâलाश विजयवर्गीय और राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सालंकी के नाम चल रहे हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ में रमण सिंह के अलावा कभी केंद्र में मंत्री रह चुके विष्णुदेव साय और तेज-तर्रार युवा नेता ओपी चौधरी के नाम चल रहे हैं। इन दोनों ही नेताओं के चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि इन्हें विधायक आप बनाइए, बड़ा आदमी बनाने की जिम्मेदारी मेरी है। पर इन तीनों में सबसे बड़ा पेंच राजस्थान में ही फंसा हुआ है। वसुंधरा राजे दिल्ली में जमी हुई हैं और उन्हें मनाने का प्रयास चल रहा है। भाजपा में कुछ लोग प्रदेश में दो उप मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा कर रहे हैं। इसके पीछे आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए जातीय संतुलन बनाना बताया जा रहा है, लेकिन हाल ही में हुए सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि भाजपा जाट और राजपूत समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने में गुरेज कर सकती है क्योंकि इससे एक समुदाय का वोट बैंक छिटकने की आशंका है। इस लिहाज से दीया कुमारी, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे इस दौड़ से बाहर हो जाती हैं। हालांकि, गोगामेड़ी हत्याकांड के बाद उपजी परिस्थितियों को टैकल करने की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को दी गई है।

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