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उत्तन के एक किसान की बोट में लगी आग… लाखों का नुकसान

– सरकार से लगाई मदद की गुहार, मछुआरे हैं समंदर के किसान

अमर झा /भायंदर

समंदर के किसान मछुआरे की बोट अगर नष्ट हो जाय तो मछुआरे को वैसे ही दर्द होता है, जैसे किसी किसान का खेत उजड़ गया हो। उसके खेती का औजार नष्ट हो गया हो। खबर उत्तन के एक मछुआरे की है, जिसके एक मात्र जीवन यापन का साधन बोट (नाव) जल कर खाक हो गई।
जहां सारा देश गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास के साथ माना रहा था, वहीं भायंदर के उत्तन स्थित एक मछुआरे का परिवार अपनी बोट में आग लग जाने से आंसू बहा रहा था।
उत्तन रहिवासी सिरिल घावटया मछ्ली पकड़ने का व्यवसाय करता था, सिरिल के पूरे परिवार का जीवन यापन राजश्री नामक वोट से मछली पकड़ कर होता था। बोट पिछले कुछ दिनों से समंदर किनारे से कुछ दूर पर खड़ी थी। बीते शुक्रवार को दिन में अचानक उस बोट को लोगों ने जलते हुए देखा कि बोट में आग लग चुकी थी और बोट पर रखे सारा सामान धू धू कर जल रही थी। खबर लगते ही स्थानीय मछुआरे बोट की तरफ भागे, लेकिन लोगों के पहुंचते-पहुंचते आग अपना काम कर चुकी थी। बोट मालिक के अनुसार, उनको 25 से 30 लाख का नुकसान हो गया। मछली पकड़ने का जाल पूरी तरह जल कर खाक हो गया। बोट का अधिकांश हिस्सा जल गया। बोट में आग लगने का सही कारण पता नहीं चल पाया, ऐसा अनुमान है कि शायद शॉर्ट-सर्किट के कारण लगी हो।
मछुआरों की तरफ से स्थानीय नगरसेवक – बर्नाड
डिमेलो एवं शर्मिला बगाजी ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि खेती करने वाले किसान की तरह ही मछुआरे भी समंदर के किसान होते है, ऐसी स्थिति में सरकार को मछुआरों की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

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