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बिना ‘जिम्मेदारी’ के मंत्री … काजू-मिठाई में रहे मस्त!

बैठक में थी बाढ़ राहत पर चर्चा
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है, लेकिन विभागों का बंटवारा अभी भी नहीं हो पाया है। कल बुधवार को ईडी सरकार के मंत्रिमंडल की हुई बैठक में लगभग सभी मंत्री उपस्थित थे। यह बिना ‘जिम्मेदारी’ के मंत्रियों की बैठक थी। इस बैठक में बिना खातेवाले मंत्रियों ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सहायता पर चर्चा करने के बजाय काजू और मिठाई खाने में ज्यादा मस्त दिखे। यहां बिना खाते के मंत्रियों के लिए काजूवड़ा, काजू कटलेट व काजू कतली मिठाई परोसी गई और वे जम कर खाते हुए नजर आए।
मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित कुल १७ मंत्री उपस्थित थे। लेकिन किसी के पास भी कोई विभाग नहीं था। क्या मुख्यमंत्री और क्या उपमुख्यमंत्री, सभी मंत्री विभागों से वंचित थे। वैसे जबतक विभागों का बंटवारा नहीं होता है, तबतक सभी का चार्ज मुख्यमंत्री के पास होता है।

कैबिनेट में दिखा भाजपा का वर्चस्व
मंत्रिमंडल की बैठक में भी भाजपा कोटे के मंत्रियों का ही वर्चस्व दिखा। वैâबिनेट में सीनियर मंत्रियों की श्रेणी में भाजपा का वर्चस्व दिखाई दे रहा है। सूचना विभाग की ओर से जारी मंत्रिमंडल बैठक की फोटो में मुख्यमंत्री के दोनों तरफ भाजपा के मंत्रियों की कुर्सी है। बैठक में मंत्री सुधीर मुनगंटीवार अनुपस्थित थे। बैठक में शिंदे गुट के मंत्री तीसरे- चौथे स्थान पर नजर आए। उपमुख्यमंत्री फडणवीस के बगल में राधाकृष्ण विखे पाटील, चंद्रकांत पाटील, गिरीश महाजन तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के बगल में विजय कुमार गावित को स्थान दिया गया था। ये सभी लोग भाजपा के मंत्री हैं।

अधिकारियों को बैठक में अनुमति नहीं
मंत्रिमंडल की शायद यह पहली बैठक है, जिसमें आईएएस अधिकारियों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। सभी अधिकारियों को बाहर रहने का निर्देश दिया गया। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों से स्पष्ट कहा गया कि जब तक विभागों का बंटवारा नहीं हो जाता है। तबतक यहां बैठक में अधिकारियों का काम नहीं है।

विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री पर दबाव
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चा हुई। इसके अलावा मंत्रियों को बंगले आबंटन और कार्यालय के आबंटन को लेकर भी चर्चा हुई। सभी मंत्री बाहर आने तक इस विषयों पर उलझे नजर आए। बेहतर विभाग और अच्छे बंगले के साथ अच्छा कार्यालय की चाह लेकर सभी मंत्री मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर दबाव बना रहे हैं।

 

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