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आश्वासनों को पूरा करने के लिए कर्ज का पहाड़ … ४४ हजार करोड़ का कर्ज लेकर चार राज्यों की सरकारें चुनावी मैदान में!

महाराष्ट्र पर १८.३३ फीसदी कर्ज, राजस्व घाटे के चलते बढ़ेगा बोझ
सामना संवाददाता / मुंबई
बजट की तुलना में की गई बड़ी-बड़ी घोषणाओं और आश्वासनों को पूरा करने के लिए और आगामी लोकसभा – विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वोटों की जोड़-तोड़ करने के लिए चार राज्यों की सरकारें ४४ हजार करोड़ रुपयों का कर्ज लेकर चुनाव के मैदान में उतरने वाली हैं। महाराष्ट्र के कर्ज का बोझ, मुनाफे की तुलना में १८.२३ फीसदी बढ़ गया है। इस बार के बजट में कुल १६ लाख २२ हजार करोड़ रुपयों का राजस्व घाटा हुआ है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार और कर्ज लेती है तो कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा व सरकार कर्ज के दल-दल में फंसती चली जाएगी।
देश के पांच राज्यों में एक साथ चुनाव हो सकते हैं, जिसके कारण राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना आनेवाले तीन महीनों में बॉन्ड के ऐवज में बाजार से भारी भरकम कर्ज ले सकते हैं। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अक्टूबर से दिसंबर के बीच जारी कर्ज के आंकड़ों से सामने आई है। इन तीन महीनों में संबंधित चार राज्य बॉन्ड बाजार से कुल २.३७ लाख करोड़ रुपए का कर्ज बाजार से ले सकते हैं। इनमें से ४४ हजार करोड़ यानी १८.५६ फीसदी कर्ज सिर्फ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना राज्य ले सकते हैं, वहीं गुजरात सरकार ६ हजार करोड़ रुपए कर्ज ले सकती है।
कौन कितना कर्ज लेगा?
गुजरात की तुलना में मध्य प्रदेश २५० प्रतिशत से अधिक कर्ज लेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने अप्रैल से अगस्त के बीच जितना कर्ज लिया है, उससे १७२ फीसदी अधिक आने वाले ३ महीनों में बॉन्ड बाजार से लेगी। राजस्थान ने अभी तक १,७१२ करोड़ रुपए से अधिक कर्ज लिया है। छत्तीसगढ़ में १०० फीसदी से और राजस्थान में केवल १४ फीसदी कर्ज ले सकते हैं।
देश का कर्ज ५२.२१ लाख करोड़ तक पहुंचा
मार्च २०२३ तक केंद्र सरकार पर कर्ज का बोझ ५२.२१ लाख करोड़ तक पहुंच गया है। जून २०२२ तक यह आंकड़ा ५०.८६ लाख करोड़ था। इस बीच, जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में कर्ज ९ महीनों में १८.८ प्रतिशत से १८.६ प्रतिशत तक घट गया है।

• महाराष्ट्र का जीएसडीपी यानी सकल राज्यांतर्गत उत्पाद ३८.७९ लाख करोड़ रुपए जिसकी तुलना में १८.३३ प्रतिशत कर्ज है।
• गुजरात का जीएसडीपी २५.६२ लाख करोड़ है और उसकी तुलना में १४.९ प्रतिशत कर्ज है।

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