एक नया मोड़

वही गर्दिश रास्तों के
वही बाहें रास्तों तक
वही सांसें रास्तों तक
वही भीगी तमन्नाएं,
यादें मेरी उसकी तरफ़,
खींचती हुई, आंखों में डुबोती हुईं
मुट्ठियों में आशाएं बांधती हुईं
एक आधी आरजू उसमें,
एक आधी आरजू मुझमें

– मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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