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एक बहन ऐसी भी… एक भाई को खोया, पूरी यूनिट को भाई बनाया!

शहीद भाई की याद में सरहद पर २४ साल से भेज रही हैं राखी
सामना संवाददाता / जयपुर
रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर जो रक्षा सूत्र बांधती है, वही उनके अमिट प्रेम की डोर होती है। प्रेम की यही डोर पहले सरहद पर अपने सैनिक भाई के हाथ पर बंधती थी। अब सरहद पर तैनात सेना की एक यूनिट के हर एक जवान के हाथ पर ये राखी बंधती है। ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। जी हां, राजस्थान में एक ऐसी बहन है, जो कारगिल युद्ध में शहीद हुए अपने भाई वैâप्टन अमित भारद्वाज की याद में उनकी पूरी यूनिट को पिछले २४ सालों से राखी भेजती आ रही हैं।
बता दें कि १९९९ में ये सिलसिला शुरू हुआ और आज भी बदस्तूर जारी है। आज शहीद अमित भारद्वाज की यूनिट का हर एक जवान बहन सुनीता धौंकरिया का भाई है। यह कहानी शहीद वैâप्टन अमित भारद्वाज और उनकी बहन सुनीता की है। दरअसल, वैâप्टन अमित भारद्वाज की बहन अपने भाई को रक्षाबंधन के अवसर पर राखी भेजा करती थीं, लेकिन कारगिल युद्ध में वैâप्टन अमित भारद्वाज शहीद हो गए। इसके बावजूद सुनीता ने ये सिलसिला नहीं तोड़ा। बदस्तूर पिछले २४ सालों से वो शहीद वैâप्टन अमित भारद्वाज की यूनिट-४ जाट रेजिमेंट के हर एक जवान के लिए राखी भेजती हैं। साथ ही हर साल अपने शहीद भाई अमित भारद्वाज की तस्वीर पर भी राखी बांधती हैं।
रक्षाबंधन के मौके पर सुनीता ने नम आंखों से बताया कि अमित ने देश सेवा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। १७ मई, १९९९ को वो शहीद हुए थे। १५ जुलाई, १९९९ को जयपुर में उन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया। इसके एक महीने बाद रक्षाबंधन का त्योहार था। उससे पहले तक वो हर साल वैâप्टन अमित भारद्वाज की यूनिट में राखी भेजा करती थीं, तब सोचा कि ये सिलसिला टूटना नहीं चाहिए। उसी वक्त १०० राखियां ४ जाट रेजीमेंट यूनिट को भेजी, तब से ये २५वां रक्षाबंधन है और ये क्रम जारी है। इससे उन्हें अमित की उपस्थिति का एहसास होता है।

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