मुख्यपृष्ठस्तंभआधार कार्ड की दिक्कतें दूर हों

आधार कार्ड की दिक्कतें दूर हों

  • राजेश महेश्वरी 

आज हम सब की जिंदगी में आधार कार्ड एक जरूरी दस्तावेज बन गया है। राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी तरह की योजनाओं के लाभ आधार कार्ड के बिना नहीं मिल पाता। इसके अलावा बैंक में खाता खुलवाने के लिए और स्कूल  में दाखिले के लिए भी आधार की जरूरत पड़ती है। पासपोर्ट बनवाने के लिए आधार कार्ड को मैट्रिक प्रमाणपत्र के आधार पर अपडेट करवाके बाकी आइडेंटी प्रूफ और बैंक खाता भी उसी अनुसार बनवाने पड़ते हैं। शुरुआती दौर में बने आधार कार्डों में कई तरह की खामियां हैं, जिन्हें अपडेट करवाना लोगों की मजबूरी बन चुकी है लेकिन किसी भी जगह पर सही ढंग से सुविधा न मिलने के कारण लोग परेशान हैं। फिलहाल अगर कोई आधार कार्ड में संशोधन करवाता है तो कुछ लोगों को इसके अपडेट के लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। अगर आधार कार्ड की हेल्पलाइन या फिर जहां से कार्ड अपडेट करवाया होता है, उनसे इससे संबंधित जानकारी मांगें तो वो एक ही रटा रटाया जवाब देते हैं कि कार्ड अपडेट में ६० से ९० दिन तक का समय लगता है, लेकिन सवाल है कि क्या ९० दिन तक हम अपने जरूरी काम रोक कर रखें?
आधार कार्ड को जब देश में लागू किया गया तो उस समय नए आधार कार्ड के साथ अपडेशन के लिए शहर के कई स्थानों पर शिविर भी लगाए जा रहे थे लेकिन अभी इन शिविरों का भी कोई अता-पता नहीं है। गली-मोहल्ले में शिविर होने से लोगों को घर-बैठे सुविधा मिल जाती थी, जिससे उन्हें यहां-वहां भटकना नहीं पड़ता था। देशभर में हजारों निजी सुविधा केंद्र भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के कठिन मानदंड के चलते बंद हो गए। जानकारी के अनुसार कोई आधार केंद्र ३० से अधिक बार गलती करता है तो यूआईडीएआई उसको काली सूची में डाल देता है। इस चक्कर में भी देशभर में हजारों आधार केंद्र बंद हुए हैं।
अभी आधार अपडेट करने की सुविधा कुछ बैंकों में शुरू है परंतु इनमें भी लोगों को चक्कर काटना पड़ रहा है। बैंकवाले तो स्टॉफ की कमी होने का हवाला देकर आधार बनाने या अपडेट करने से गुरेज करते हैं। डाकघरों में भी कमोबेश बैंकों जैसे हालात हैं। वहीं सर्वर और जीपीएस की दिक्कतों के कारण एक दिन में ज्यादा आधार अपडेट नहीं हो पाते। आधार केंद्रों में सुबह से लंबी लाइने लगना आम बात है। वहीं जहां अपडेशन शुरू हैं, उनमें काफी समय लग रहा है और सर्वर धीमे होने की समस्या भी परेशानी बढ़ाने का काम कर रही है।
पिछले काफी समय से देशभर में बच्चों के बचपन में बनाए आधार को अभी अपडेट कराने के लिए अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आधार केंद्रों की कम संख्या होने की वजह से नाम, पते या उम्र से संबंधित अपडेट नहीं हो पा रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ बच्चों की फिंगर प्रिंट जहां नए आते हैं, वहीं बुजुर्गों की हाथों की रेखा मिट जाती हैं। इसमें काफी समय जाता है, जिसके चलते बच्चों और बुजुर्गों के आधार अपडेशन और बनाने में कई कठिनाइयां सामने आती हैं। हालांकि इस काम की एवज में नियमों के मुताबिक ५० से १०० रुपए की फीस ली जा रही है। इतना ही नहीं कई बार तो सही तरीके से अपडेट भी नहीं किया जाता और पैसे ले लिए जाते हैं। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई आधार केंद्रों में मनमाना पैसे वसूलने की शिकायत भी मीडिया ने रिपोर्ट की है। इन सबके चलते लोगों को मामूली कामों के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।
देशभर में हजारों लोगों को आधार कार्ड संबंधित दस्तावेज अपडेट नहीं होने की वजह से शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा बैंक व डाकघर संबंधित कार्यों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आज आधार में फोन नंबर को जोड़ने, जन्मतिथि को दुरुस्त करने, पता बदलने के साथ अन्य कई चीजों को दुरुस्त करना जरूरी हो गया है। इसके लिए प्राधिकरण व संबंधित एजेंसियों को वॉर्ड और पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर लोगों को सेवाएं देनी चाहिए, ताकि लोगों को घर द्वार पर ही यह सुविधा मिल सके। आधार बनाने में सख्त नियमों के पालन से किसी को परहेज नहीं है लेकिन इसको बनाने और अपडेट कराने की गति भी तेज होनी चाहिए।

(लेखक उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

 

अन्य समाचार