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केन्या में जान जोखिम में डालकर अबॉर्शन!

मनमोहन सिंह

एक छोटे से कमरे में एक बेड पर एक महिला लेटी हुई है। उस कमरे में दो लोग हैं सपेâद एप्रन पहने। एक ने ग्लव्स पहन रखा है। कमरे में तेज रोशनी है कुछ मेडिकल औजार रखे हुए हैं।

जमीन पर दो बाल्टियां रखी हुई हैं। ग्लव्स पहना हुआ व्यक्ति उस महिला से कहता है कि वह उसके यूट्रस में एक लिक्विड डालने जा रहा है, जिससे उसे कुछ तकलीफ होगी। लेकिन उसे सहना पड़ेगा क्या वह तैयार है? महिला ‘हां’ में सिर हिलाती है। वह उसके यूट्रस में लिक्विड डालकर चला जाता है। दूसरा व्यक्ति भी दरवाजा बंद कर निकल जाता है। आधा घंटा बीत गया है। उस महिला को काफी तकलीफ हो रही है। वह जोर से चिल्लाना चाह रही है लेकिन उसने जोर से अपने दांत भींच रखे हैं। वह छटपटा रही है उसके यूट्रस में बुरी तरह से दर्द हो रहा है। उसे लग रहा है जैसे उसके गर्भ से कोई गोला बाहर निकल रहा है। वह पसीना-पसीना हो गई है। इस जानलेवा तकलीफ से उसे अगले ५-६ घंटे तक गुजरना है तब जाकर निजात मिलेगी उसे उस अनचाहे गर्भ से जिसके लिए उसने अपनी जान जोखिम में डाल रखी है। वह महिला केन्या की है लेकिन अबॉर्शन के लिए इस छोटे से दड़बेनुमा असुरक्षित अनहाइजीनिक क्लीनिक में वो आई है जो केन्या से बाहर है।

केन्या में गर्भपात एक जटिल मसला है। औपनिवेशिक युग में बनाए गए कानून के मुताबिक गर्भपात गैरकानूनी है। वहां की दंड संहिता महिला गर्भपात करानेवाले व्यक्ति और आवश्यक सामग्री आपूर्ति करवानेवाले व्यक्ति को अपराधी मानती है। अपराध सिद्ध होने पर मौत तक की सजा मुकर्रर की जा सकती है। हालांकि, २०१० का संविधान कानूनन गर्भपात की अनुमति तब देता है जब ‘मां का जीवन या स्वास्थ्य खतरे में हो’ या जब बलात्कार या अनाचार की वजह से गर्भ ठहरा हो!

नैरोबी में एमरेफ इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रजनन और यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रोपेâसर जोआचिम ओसूर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों के चलते यहां के हालात स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए कठिन हो गए हैं। उनकी यह बात काबिले गौर है कि कोर्ट में खड़े मेडिकल प्रैक्टिशनर की जिंदगी इस बात पर निर्भर करती है कि न्यायाधीश मामले की वैधता को किस तरीके से परिभाषित करता है। दोषी व्यक्ति छूट भी सकता है और सजा भी पा सकता है!

२००४ में डॉ. जॉन न्यामू को दो नर्सों के साथ दो भ्रूणों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, इस अपराध में मृत्युदंड का प्रावधान था। हालांकि, वह दोषी नहीं पाए गए लेकिन उनके मामले को लेकर केन्या में मीडिया ने सनसनी मचाकर रख दी, जिसकी वजह से २०१० में संविधान के मसौदे में बदलाव करना पड़ा लेकिन आज भी अबॉर्शन केन्या में आसान नहीं है।

डॉक्टर के अनुसार कानूनी जटिलताओं की वजह से यहां की महिलाएं और युवतियां खुद ही अबॉर्शन की कोशिश करने लगती हैं या फिर प्रशिक्षित लोगों से मदद लेती हैं जो कभी-कभी जानलेवा हो जाता है, जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।

वैश्विक मानवाधिकार संगठन, सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव राइट्स की रिपोर्ट बताती है कि केन्या में असुरक्षित गर्भपात के कारण हर दिन लगभग सात महिलाओं और लड़कियों की मौत हो जाती है। हजारों और लोग अस्पताल में भर्ती हैं। नैरोबी के बाहरी इलाके में ऐसे कई अवैध क्लिनिक हैं, जो २,५०० केन्याई शिलिंग यानी १,२०० से १४,०० रुपए में अबॉर्शन करते हैं लेकिन यह सब जान को जोखिम में डालने जैसा है।

हालांकि, पिछले साल मार्च २०२२ में केन्या के उच्च न्यायालय ने अबॉर्शन को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है, लेकिन महिलाओं और किशोरियों का डर अभी भी कायम है। यही वजह है कि महिलाओं को जान जोखिम में डालकर दड़बेनुमा क्लीनिक में अबॉर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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