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कुशीनगर के हाईवे पर हादसा: छह लोगों की मौत

मोतीलाल चौधरी / कुशीनगर
गोरखपुर से कुशीनगर आ रही बस का पहिया जगदीशपुर के पास पंक्चर हो गई। इसलिए पीछे से आ रही दूसरे बस में यात्री सवार हो रहे थे, तभी पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। जिसके कारण घटना स्थल पर ही छह लोगों की मौत हो गई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर से यात्रियों को लेकर कुशीनगर आ रही बस का पहिया जगदीशपुर के पास पंक्चर हो गई थी यात्री दूसरे बस में सवार हो रहे थे, तभी पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से चार की पहचान तो रात में ही हो गई थी, लेकिन दो लोगों के शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो जाने की वजह से शिनाख्त नहीं हो पाई थी। अब उनकी पहचान हो गई। इसमें से एक बिहार के शैलेश थे, जो बस चालक थे तो दूसरे कुशीनगर के अभिषेक तिवारी थे। अभिषेक बेटे हर्ष के साथ कुशीनगर आ रहे थे। हादसे वाली बस में सवार अभिषेक तिवारी (40) पुत्र रामआधार तिवारी अपने 15 साल के बेटे हर्ष तिवारी को लेकर घर लौट रहे थे। हर्ष सैनिक स्कूल लखनऊ में दसवीं का छात्र है। दिवाली पर स्कूल की छुट्टी होने के बाद बेटे को लेकर ट्रेन से गोरखपुर आए और बस से घर के लिए निकले थे। हादसे में पिता अभिषेक की मौत हो गई, वहीं बेटा हर्ष मेडिकल काॅलेज में भर्ती है।  हादसे में नितेश की मौत हो गई जबकि प्रीति भी घायल हो गई। नितेश तीन भाइयों में छोटा था। पिता मुंबई में काम करते हैं। बड़े भाई विनय सिंह पुणे में काम करते हैं। सूचना पर घर आए। इसी तरह से जनार्दन कुशवाहा बस्ती में टीनशेड लगाने का काम करते थे, दिवाली पर वह भी बस से घर लौट रहे थे। इनकी चार साल की एक बेटी परी है, जबकि 18 महीने का बेटा अर्पित। बिहार के रहने वाले बस चालक 35 वर्षीय शैलेश पटेल की भी हादसे में मौत हो गई। शैलेश के चार बच्चे हैं। दो बेटे और दो बेटियां। दीपक (छह) , ननकी (चार), पूजा (10) और नेहा (आठ)। भाई नरेश पटेल का कहना है कि वे दो भाई हैं। दोनों अलग रहते थे। शैलेश की मौत के बाद उसके परिवार की भी सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। हिमांशु यादव ट्रक ड्राइवर था। कानपुर में गाड़ी खड़ी कर वह दिवाली में घर आ रहा था। दिवाली में उसके यहां लक्ष्मी प्रतिमा स्थापित होती है। ट्रेन से गोरखपुर आया और यहां से बस से जा रहा था कि हादसे का शिकार हो गया। वह तीन भाइयों में सबसे छोटा था। पांच बहने हैं, तीन की शादी हो चुकी है। दो बहने हिमांशु से भी छोटी हैं उनकी शादी नहीं हुई हैं। पिता खेती-बारी का काम करते हैं। शादी का जिम्मा भी हिमांशु के ऊपर ही था। चार महीने पहले ही घर से निकला था। हिमांशु का मोबाइल,आधार कार्ड, डीएल गायब है, बैग भी खाली है। उधर, एक अन्य यात्री सुरेश पुत्र जवाहिर, पूणे से मुंबई गए और वहां से ट्रेन से गोरखपुर आए। बस में सवार होकर निकले थे। राजगीर का काम करते थे, दो भाइयों में सबसे बड़े थे। उनका एक बेटा डेढ़ साल का है। तीन साल पहले ही शादी हुई है।

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