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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर नहीं थम रहे हादसे, ८० प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण मानवीय भूल!

सामना संवाददाता / मुंबई
पिछले छह वर्षों में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर तेज गति से गाड़ी चलाने के कारण ५४३ लोगों की मौत हो गई है, जबकि राजमार्ग पर लगे बोर्ड पर साफ-साफ लिखा होता है कि ‘तेज गति का नशा जीवन के लिए खतरनाक’, लेकिन यह लोगों द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है। निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि इनमें से अधिकतर दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती हैं। विधानमंडल के मानसून सत्र की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं के आंकड़े और कारण विश्लेषण तैयार किए गए हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर पिछला डेटा सामने आ गया है।
प्रकृति भी जिम्मेदार
इस एक्सप्रेसवे पर अक्सर दरारें पड़ती रहती हैं। मानसून के दौरान बोरघाट में भूस्खलन को रोकने के उपाय सुझाए गए। इसके अलावा अमृतांजन पुल, खंडाला सुरंग, अदोशी सुरंग, भाटन सुरंग, उर्से पास पर तीन किमी  क्षेत्र भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं। लेकिन उसके लिए हाई टेंसिल मेश, रॉक बोल्टिंग, रॉ कफ बैरियर लगाने का काम पूरा हो चुका है।
हादसों को रोकने के किए जा रहे इंतजाम
दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को पूरा करने और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता प्रदान करने के लिए एक्सप्रेसवे पर खालापुर टोल, कुसगांव और तलेगांव टोल पर चार त्वरित प्रतिक्रिया वाहन (क्यूआरवी) तैनात किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटना पीड़ितों के लिए मदद पाने का समय दस मिनट है और अधिकतम प्रतिक्रिया समय बीस मिनट है।
तकनीकी गड़बड़ी के कारण २० प्रतिशत दुर्घटनाएं
इस रिपोर्ट में दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है। तदनुसार, यह बताया गया है कि ८० प्रतिशत दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती हैं और २० प्रतिशत दुर्घटनाएं वाहनों में तकनीकी गड़बड़ी के कारण होती हैं। मानवीय भूल के प्रमुख कारण एक्सप्रेसवे पर यातायात नियमों का पालन न करना, सीट बेल्ट का प्रयोग न करना, तेज गति से वाहन चलाना, जिससे पीछे चल रहे वाहनों से टकराना, वाहन से नियंत्रण खोना, वाहन पलटने के कारण गंभीर दुर्घटनाएं हुई हैं।

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