मुख्यपृष्ठनए समाचारएक्ट्रेस की अधूरी जिंदगानी... मौत के बाद फिल्मों की बनी कहानी!

एक्ट्रेस की अधूरी जिंदगानी… मौत के बाद फिल्मों की बनी कहानी!

मनमोहन सिंह
१५ जनवरी, १९४७, लॉस एंजिल्स के लीमर्ट पार्क के फुटपाथ पर एक युवा महिला की क्षत-विक्षत डेड बॉडी मिलने से हड़कंप मच गया। महिला की कमर कटी हुई थी। उसकी आंतें गायब थीं। चेहरे से कान तक वार किया गया था। शरीर पर कट और चोट के निशान थे। त्वचा के पूरे हिस्से को हटा दिया गया था। जिस महिला ने उसे पहली बार देखा, उसे लगा जैसे वह कोई मैनक्वीन हो। पुलिस ने बॉडी को कब्जे में लिया और जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया। बता दें कि इस महिला के जीवन पर कई किताबें लिखी गई हैं। उन पर फिल्म भी बनी।
जांच में एफबीआई को पता चला कि उस महिला का नाम एलिजाबेथ शॉर्ट था, वो एक स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस थी। अगले दिन सारे के सारे न्यूजपेपर्स एलिजाबेथ शॉर्ट की हत्या की सुर्खियों से भरे हुए थे। लॉस एंजलिस एक्जामिनर ने अतिरिक्त संस्करण निकाला। हेडिंग्ज कुछ इस तरह थीं, `सेक्स का शौकीन हत्यारा’। प्रेस में मर्डर की सनसनीखेज खबर ने शॉर्ट को एक पार्टी गर्ल के रूप में पेश किया, जो अक्सर नाइट क्लबों में जाती थी। वे जानना चाहते थे कि एक स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस हर कुछ महीनों में एक होटल से दूसरे होटल व अपार्टमेंट्स का किराया वैâसे चुकाती थी? कुछ न्यूजपेपर्स उसको `चीप’ साबित करने में तुले हुए थे।
जब शॉर्ट की हत्या हुई, तब वह २२ साल की थी। न्यूजपेपर्स ने सनसनीखेज बनाने के लिए शॉर्ट को १९४६ की वेरोनिका लेक फिल्म नोयर, `द ब्लू डाहलिया’ के रेफरेंस में `ब्लैक डाहलिया’ करार दिया था, वजह उसके आकर्षक काले बाल और काले कपड़ों के प्रति उसकी पसंदगी। आगे की जांच में पुलिस को पता चला कि शॉर्ट को आखिरी बार ९ जनवरी, १९४७ को देखा गया था, जब वह बिल्टमोर होटल, डाउनटाउन लॉस एंजलिस में कार से बाहर निकली थी। उस समय उसने काला सूट पहना हुआ था, कोट बिना कॉलर कार्डिगन शैली का, व्हाइट फूला हुआ ब्लाउज, ब्लैक साबर ऊंची एड़ी के शू, नायलॉन सॉक्स, व्हॉइट ग्लव्स, पूरी लंबाई वाला बेज कोट, काले प्लास्टिक का हैंडबैग, जिसमें ब्लैक टेलीफोन डायरी थी। कार से निकल कर वह बिल्टमोर की लॉबी में गई थी।
शॉर्ट को जीवित देखने वाला आखिरी व्यक्ति पाइप क्लैंप सेल्समैन, रॉबर्ट `रेड’ मैनली था, जो उसे सैन डिएगो से बिल्टमोर ले गया था, जहां वह दोस्तों के साथ रह रही थी। उसने उससे कहा कि वह वहां अपनी बहन से मिलने जा रही है और उसके साथ बर्कले चली जाएगी। मैनली ने पुलिस को बताया कि वह उसे वहीं छोड़कर अपनी पत्नी के पास वापस घर चला गया। पुलिस ने उस पर एक संदिग्ध के रूप में मामला दर्ज किया। वो कई पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद मैनली दोषमुक्त साबित हुआ।
२४ जनवरी को हलचल मच गई, जब `हत्यारे’ ने प्रेस को एक लिफाफा भेजा, क्योंकि तब तक पुलिस इस बात का पता लगाने में असफल रही थी कि आखिर हत्यारा कौन था और मर्डर की वजह क्या थी? लिफाफे में एक अखबार के पन्ने के फिल्मी विज्ञापनों से काटे गए शब्दों से तैयार किया गया एक पत्र भी शामिल था, लिखा गया था `स्वर्ग यहां है!’ और `यहां डाहलिया का सामान है।’ सामान में शॉर्ट का बर्थ सर्टिफिकेट, एड्रेस डायरी, उसका बिजनेस कार्ड और कुछ तस्वीरें शामिल थीं। एड्रेस डायरी के आधार पर ७५ लोगों से पूछताछ की, लेकिन पुलिस किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और नहीं किसी को आरोपी बनाया जा सका। जांच टीम ने यूएससी मेडिकल स्कूल को एक वारंट भेजा। जिस तरह से शरीर को काटा गया था। पुलिस को संदेह था कि कोई मेडिकल सर्जन संभवत: हत्यारा हो सकता है, लेकिन यहां भी पुलिस दल के हाथ निराशा ही लगी। इसी हत्याकांड को एक सीरियल किलर, जिसने १९३४ और १९३८ के बीच क्लीवलैंड में पीड़ितों को टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे, से जोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी असफलता हाथ लगी। आज तक यह हत्या अनसुलझी है।

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