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अडानी की अड़चनें बढ़ीं…इंडिया से लेकर मॉरीशस तक मुसीबतों का मंजर!

कई तरह के घोटाले करके दुनिया के अमीरों की लिस्ट में शुमार हुए गौतम अडानी की अड़चनें बढ़ती जा रही हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च के खुलासे के बाद अडानी चाहे कितनी भी सफाई दें पर इंडिया से लेकर मॉरीशस तक मुसीबतों का मंजर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि मॉरीशस सरकार को अडानी द्वारा किए जाने वाले घपले का अंदाज बहुत पहले ही हो गया था। तभी तो उसने मई २०२२ में ही अडानी की एक शेल कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, मॉरीशस के वित्तीय नियामक वित्तीय सेवा आयोग (एफएससी) ने इमर्जिंग इंडिया फंड मैनेजमेंट लिमिटेड (ईआईएफएम) के व्यापार और निवेश लाइसेंस रद्द कर दिए थे। ईआईएफएम दो विदेशी फंड्स का नियंत्रक था, जिसने अडानी समूह की कंपनियों में निवेश किया था और अब जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय सेवा आयोग प्रवर्तन समिति ने ईआईएफएम द्वारा कानूनों के कई प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लाइसेंस को रद्द किया था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अडानी की कंपनियां मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त रही हैं। इस कार्रवाई के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने, कॉर्पोरेट प्रशासन सुनिश्चित करने की कोशिश की गई। लाइसेंस रद्द करने का मतलब है कि ईआईएफएम का परिचालन बंद हो गया है। इसके अलावा हाल ही में अडानी का कोयला घोटाला भी सामने आया था। इसमें गुजरात की भाजपा सरकार ने दो बिजली खरीद समझौतों के तहत पिछले पांच वर्षों में अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड को ३,९०० करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया है। इसकी ईडी से जांच कराने की मांग की गई है।
बता दें कि इस साल की शुरुआत में अमेरिकी शॉर्ट सेलिंग रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने एक बम फोड़ते हुए हिंदुस्थान की सबसे बड़ी कंपनी अडानी ग्रुप को शेयर मार्केट में हेर-फेर करनेवाला करार देते हुए कहा था कि अडानी ग्रुप ने अपने शेयरों की कीमतों को मैन्युपुलेट किया है। इसके बाद बाजार में भूचाल आ गया और अडानी ग्रुप के शेयर धड़ाम से गिर पड़े। अब जबकि आए महीने बाद अडानी ग्रुप कुछ संभला था तो आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट्स (ओसीसीआरपी) ने एक दूसरा बम फोड़ दिया, जिससे एक बार फिर अडानी ग्रुप जमीन पर नजर आ रहा है। ओसीसीआरपी की रिपार्ट में दो संदिग्ध नाम बताए गए हैं, जिनके जरिए ये खेल रचा गया।
इस नई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि एक समय ४३ करोड़ डॉलर (३,५५८ करोड़ रुपए) तक पहुंच गए अडानी स्टॉक होल्डिंग्स से जुड़े कम से कम दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें रहस्यमय निवेशक समूह के तार बहुसंख्यक शेयरधारकों यानी अडानी परिवार के साथ सीधे जुड़े हुए हैं। ये दो लोग हैं नासिर अली शाबान अली और चांग चुंग-लिंग और इनके लंबे समय से अडानी परिवार के साथ कारोबारी रिश्ते रहे हैं। वे अडानी समूह की कंपनियों और समूह के गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी से जुड़ी फर्मों में निदेशक और शेयरधारक के तौर पर शामिल रहे हैं।
गुपचुप शेयरों की खरीद-फरोख्त
दस्तादवेजों से पता चला है कि मॉरिशस स्थित दो फंड-इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड और ईएम रिसर्जेंट फंड ने २०१३ से २०१८ के बीच अडानी की चार कंपनियों के शेयरों में बड़ी मात्रा में निवेश और खरीद-फरोख्त की थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन विदेशी या ऑफशोर कंपनियों के माध्यम से दोनों ने गुपचुप तरीके से अपनी भागीदारी छिपाकर सालों तक अडानी के शेयरों की खरीद-बिक्री की और इस तरीके से काफी मुनाफा कमाया।

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