मुख्यपृष्ठनए समाचारआदित्य ठाकरे की मियावाकी योजना का मुंबईकरों को मिल रहा है लाभ

आदित्य ठाकरे की मियावाकी योजना का मुंबईकरों को मिल रहा है लाभ

– ४.५ लाख पेड़ों का छोटा जंगल

-मियावाकी पद्धति से मुंबई का सुधरेगा पर्यावरण

रामदिनेश यादव / मुंबई

पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में रियल इस्टेट, मेट्रो रेल निर्माण अन्य कई बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के लागू होने से मुंबई में प्रदूषण बढ़ा है। मुंबई के कुछ हिस्सों में तापमान भी बढ़ गया है, इसलिए इस चुनौती से निपटने के लिए युवासेनाप्रमुख और पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने मियावाकी वन कॉन्सेप्ट को लागू कर मुंबई में ऐसे जंगल बनाने की शुरुआत की। मुंबईकरों को अब इसका लाभ हो रहा है। मनपा कुल ६४ ठिकानों पर कम जगह में अधिक से अधिक वृक्षों का रोपण कर घने जंगल बनाने की योजना पर काम कर रही है।
मनपा के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में अब तक ६४ मियावाकी जंगल लगाए गए हैं। मियावाकी अभियान २ जनवरी, २०२० को मनपा की शहरी वन परियोजना के तहत शुरू किया गया था और इस तरह का पहला जंगल पूर्वी उपनगरों में वडाला के भक्ति पार्क में बनाया गया था। इस परियोजना के तहत सबसे बड़ा मियावाकी जंगल चांदीवली के नाहर अमृत शक्ति उद्यान में बनाया गया था, जिसमें १३ एकड़ में ४१,००० से अधिक पौधे लगाए गए थे।
मनपा अधिकारियों ने कहा कि इन ६४ जंगलों में अब तक ४,००,००० से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। मनपा के गार्डन सेल ने २०२० में इन वनों की स्थापना के लिए पूरे मुंबई में १,१०० भूखंड निर्धारित किए थे, जिनमें से ६० से अधिक पूरे हो चुके हैं।
यहां मियावाकी वन बनाने का काम शुरू
मनपा के उद्यान विभाग के अधीक्षक जितेंद्र परदेशी ने कहा कि फिलहाल मरोल (अंधेरी-पूर्व) में औद्योगिक क्षेत्र में मनपा मियावाकी पद्धति से एक शहरी जंगल बना रही है। ये हरे पौधे कार्बन स्तर को विनियमित करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यह वन नई जैव विविधता को प्रोत्साहित करते हैं और इसके चारों ओर एक विशेष तंत्र विकसित होता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और सतह के तापमान को नियंत्रित करता है। इससे पर्यावरण बहुत बेहतर बनाने में योगदान मिल रहा है।
भविष्य के लिए क्या योजनाएं हैं
अगले एक वर्ष में मनपा का लक्ष्य विभिन्न स्वदेशी प्रजातियों के ८०,४०० पेड़ लगाकर १४ और शहरी वन बनाना है। जितेंद्र परदेशी ने कहा कि इस परियोजना के लिए निर्धारित विभिन्न भूखंडों में इस साल के अंत तक १,००,००० पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि नए मियावाकी वनों में से कुछ को बेस्ट कॉलोनी, चांदीवली के स्वामी विवेकानंद उद्यान के नजदीक एक खुले भूखंड और जोगेश्वरी के महाकाली गुफाओं रोड पर एक भूखंड पर विकसित किए जाने की उम्मीद है, जिसमें कुल ३०,००० पौधों का बैंक होगा।
मियावाकी कैसे उपयोगी है?
देशी पेड़ों का घना हरा आवरण उस क्षेत्र के कार्बनडाई ऑक्साइड को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां कल कारखाने स्थापित है। पेड़ों का यह आवरण सतह के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। इन वनों के लिए उपयोग किए जानेवाले कुछ सामान्य देशी पौधों में अंजन, आमला, बेल, अर्जुन और गुंज शामिल हैं।

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