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रानीबाग पर ‘आदित्य ठाकरे’ की योजना रंग लाई … चार दिनों में ३७ लाख की कमाई!

• पर्यटकों की उमड़ी भीड़
• पेंग्विन सहित बाघ के शावक पर्यटकों को खूब भाए
रामदिनेश यादव / सामना
भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले चिड़ियाघर और बॉटनिकल गार्डन, जिसे रानीबाग के नाम से जाना जाता है। लगभग ५ साल पहले दम तोड़ रहा था, लेकिन राज्य में आई महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे की दूरदर्शी योजना के तहत हुए विकास काम से उसकी शक्ल ही नहीं, बल्कि दशा भी सुधर गई। आज हालात ये हैं कि रानीबाग में मात्र एक दिन में ४० लाख पर्यटक पहुंचते हैं और लगभग १५ लाख रुपए की कमाई होती है। यहां ज्यादातर पर्यटक पेंग्विन और बाघिन के शावकों को देखने में खूब उत्सुक दिखे। दीपावली के अवसर पर छुट्टियों का लाभ लेते हुए यहां १२,१३,१४,१५ नवंबर को कुल एक लाख से अधिक संख्या में पर्यटक आए, इनसे रानीबाग को कुल ४० लाख रुपए तक की कमाई हुई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है।
जानकारी के अनुसार, यहां मंगलवार को सबसे ज्यादा भीड़ देखी गई। मनपा के एक अधिकारी ने कहा कि मंगलवार के दिन ३९,७९३ लोग रानीबाग में आए। टिकट बिक्री से १४.६१ लाख रुपए प्राप्त हुए। दिवाली की छुट्टियों के कारण यहां भीड़ देखी जा रही है। इससे पहले १ जनवरी को यहां ३९,१०६ आगंतुक आए और टिकटिंग से १४.५३ लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था।
पेंग्विन का खास आकर्षण
हम्बोल्ट पेंग्विन और बाघिन के शावक यहां आकर्षण का केंद्र रहे हैं। हालांकि, शेर मुंबई के इस प्राणी संग्रहालय के लिए अब तक सपना बने हुए हैं, क्योंकि प्रशासन गुजरात के केवडिया बाग चिड़ियाघर के जवाब का इंतजार कर रहा है।
रानीबाग के अधीक्षक डॉ. संजय त्रिपाठी ने बताया कि रानीबाग में इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों का आगमन कभी नहीं हुआ था। लेकिन अब रानीबाग में विभिन्न विकास कार्यों के चलते यहां लोगों को मनोरंजन के लिए अब तमाम साधन उपलब्ध हैं, इसका भी लोग खूब फायदा उठा रहे हैं। यहां आने वाले लोग मनोरंजन से खुश होते हैं। बच्चे और बुजुर्ग भी एंजॉय करते हैं।

आदित्य ठाकरे की योजना सफल
महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान पर्यावरण और पर्यटन मंत्री रहे आदित्य ठाकरे ने रानीबाग के विकास के लिए तमाम काम किया। एक तरफ जहां उन्होंने खूब निधि उपलब्ध कराई तो वहीं समय-समय पर बैठक लेकर इसके काम को तेजी से पूरा किया। रानी बाग के विकास के लिए उन्होंने अधिकारियों को पूरी तरह छूट दी और पेंग्विन से लेकर तमाम अन्य जानवर और पक्षियों को यहां पर लाने के लिए अनुमति दिलाने में सहयोग किया। उनके प्रयासों के बाद रानी बाग एक बार फिर से जीवित हो चुका है।

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