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आदित्य ठाकरे का जोरदार सवाल : दावोस में २८ घंटे में ४० करोड़ किए खर्च, महाराष्ट्र को क्या मिला?

हमारी सरकार आई तो सड़क घोटाले की जांच होगी
सामना संवाददाता / मुंबई
दावोस में राज्य के असंवैधानिक मुख्यमंत्री अपनी टीम के साथ महाराष्ट्र के लिए निवेश लाने गए थे। लेकिन निवेश को लेकर मुख्यमंत्री गंभीर नहीं थे। उन्होंने २८ घंटे के लिए ४० करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इससे महाराष्ट्र को क्या मिला? ऐसा तीखा सवाल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व विधायक आदित्य ठाकरे ने ‘मिंधे’ सरकार से पूछा है। उन्होंने पूछा कि प्रत्येक दिन १० करोड़ रुपए कहां खर्च किए गए हैं? इसका जवाब मिंधे सरकार को देना होगा। दावोस से मिले निवेश के आंकड़ों में भी झोल होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि जो निवेश महाराष्ट्र में घोषित हो चुके थे, उन्हें भी दावोस में पुन: दिखाया गया है। आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री को इस मामले में खुली चर्चा की चुनौती दी। दादर स्थित शिवसेना भवन में आयोजित प्रेस वार्त्ता में वे बोल रहे थे। इस मौके पर मुंबई की सड़क कंक्रीटाइजेशन घोटाले को लेकर उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आएगी तो निश्चित ही इसकी जांच कराई जाएगी।
बता दें कि गत १६ से २० तारीख तक दावोस में सरकार का आधिकारिक कार्यक्रम निर्धारित था। चार दिन में लगभग ४० करोड़ रुपए खर्च किए गए। दावोस में प्रत्येक दिन १० करोड़ रुपए खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि दावोस जाने के लिए चार्टर्ड प्लेन का उपयोग किया गया, जिसका औसतन खर्च २ से २.५ करोड़ रुपए आता है। वे चार्टर्ड से गए-आए इसका हमें विरोध नहीं, लेकिन चार्टर्ड प्लेन समय पर पहुंचने के लिए किया जाता है। ये उसके बावजूद लेट पहुंचे हैं। उन्होंने वहां कई बैठकें की ही नहीं। कई बैठकें रद्द कर दी गर्इं। तो कई बैठकों में वे अनुपस्थित रहे। इस दौरे पर क्या उनके दोस्त और परिवार के सदस्य साथ गए थे? यह बताते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनका दौरा खर्च अधिकृत या अनधिकृत है, ऐसे तमाम सवालों का जवाब उन्हें देना चाहिए।

मुख्यमंत्री राज्य में निवेश लाने के लिए दावोस गए थे। पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व विधायक आदित्य ठाकरे ने उनके इस दौरे की पोल खोल दी है। इस मामले में आदित्य ठाकरे ने जानकारी देते हुए कहा कि दावोस में मुख्यमंत्री का पहला दिन व्यर्थ गया, दूसरे दिन वे वहां परिषद में एक बार ही बोल पाए, उसके बाद रात में मुंबई लौट आए और यहां आकर कहा कि मैं मोदी का आदमी हूं। जब उन्हें मात्र २८ घंटे रुकना था तो ४० करोड़ रुपए क्यों खर्च किए? इसका कोई विवरण एमआईडीसी ने भी नहीं दिया।
आदित्य ठाकरे ने ‘खोके’ सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस खर्च एवं बैठकों को लेकर एमआईडीसी ने कहीं कोई जानकारी साझा नहीं की है। इस अवसर पर आदित्य ठाकरे ने माविआ सरकार के दावोस दौरे का कार्यक्रम पढ़कर सुनाया और मुख्यमंत्री को खुली चुनौती दी कि दावोस में जो काम किया, उसके बारे में वे आमने-सामने बैठकर चर्चा करने को तैयार हैं।
चार्टर्ड के खर्च क्यों, जब लेट ही जाना था?
आदित्य ठाकरे ने दावोस दौरे पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला बोला। असंवैधानिक मुख्यमंत्री ने दावोस जाते समय एक चार्टर्ड विमान का इस्तेमाल किया। आमतौर पर २ से २.५ करोड़ रुपए खर्च हो जाते थे। यह खर्च भी राज्य वहन करता है। लेकिन जब आप कमर्शियल प्लेन से जा सकते हैं तो चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल क्यों करते हैं?

दावोस में मिले निवेश के आंकड़े झूठे!
प्राप्त जानकारी के अनुसार १३ दिसंबर, २०२२ को दावोस में इस सरकार ने चार कंपनियों के साथ करार किया, जबकि इन कंपनियों के साथ पहले ही समझौता घोषित हो चुका था। सरकार ने घोषित कार्यों को दिखाकर झूठ बोला है। महाराष्ट्र में हुए एमओयू को वहां दिखाया गया।

वेदांता की गुजरात में निवेश में रुचि नहीं
वेदांता कंपनी के महाराष्ट्र से गुजरात ले जाए जाने के मामले में आदित्य ठाकरे ने कहा कि गुजरात गए वेदांता-फॉक्सकॉन कंपनी वहां निवेश करने में रुचि नहीं ले रही है। विभिन्न कारणों से वह असमंजस में है। मैं मुख्यमंत्री से कहूंगा कि वे फॉक्सकॉन कंपनी से पुन: बात करें अब भी वेदांता-फॉक्सकॉन महाराष्ट्र में आ सकती हैं।
सड़क कंक्रीटीकरण नहीं, कार्टेलाइजेशन
सड़क कंक्रीटीकरण घोटाले को लेकर आदित्य ठाकरे ने सरकार को घेरते हुए तीखा हमला करते हुए कहा कि बिना टेंडर, बिना चर्चा के ठेकेदारों को काम दे दिए गए। यह पूरा मामला कार्टेलाइजेशन का है। पहले पांच ठेकेदार नियुक्त कर उन्हें काम दिया गया था। पांच काम पांच कंपनियों को बांटा गया है। इससे साफ है कि टेंडर प्रक्रिया लागू नहीं की गई है। सड़क कंक्रीटीकरण घोटाले के बाद अब इस मामले में भी मैं मुख्यमंत्री को चर्चा करने की खुली चुनौती देता हूं। इसमें भ्रष्टाचार है। इसकी जांच होनी चाहिए।

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