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घातियों के दिल को लगा आदित्य ठाकरे का तंज, दावोस प्रतिनिधिमंडल से ७ लोगों को किया अलग

सामना संवाददाता / मुंबई
स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व वित्तीय परिषद में मुख्यमंत्री के साथ गए ५० सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पर शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे के तीखे तंज को घाती सरकार ने दिल पर ले लिया। इसीलिए दावोस प्रतिनिधिमंडल से मुख्यमंत्री ने अब सात लोगों को अलग कर दिया है। इस तरह की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई है। हालांकि, दौरे से अलग किए गए नए प्रतिनिधिमंडल की जानकारी मुख्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय को दी है क्या और विदेश मंत्रालय ने इसकी अनुमति दी है क्या? इस तरह का तीखा सवाल भी आदित्य ठाकरे ने ‘एक्स’ पर पूछा है।
दावोस में होनेवाले वैश्विक वित्तीय परिषद में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पूरे परिवार के साथ गए हैं। लेकिन उनके साथ राज्य के साथ होने वाले विभिन्न निवेश समझौता के लिए ५० लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी जाने वाला था। हालांकि, दावोस के अनुभव को देखते हुए वहां केवल १० से १२ लोगों के टीम की जरूरत है। फिर इतने व्यक्ति और प्रतिनिधिमंडल की दावोस दौरे के लिए जरूरत है क्या, इस तरह का सवाल पूछकर दौरे पर खुद के खर्च पर जानेवाले व्यक्तियों के नामों की घोषणा करो और महाराष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है, उसे भी स्पष्ट करो, ऐसी चुनौती आदित्य ठाकरे ने सोमवार को प्रेस कॉन्प्रâेंस लेकर उद्योग मंत्री को दी थी। उसके बाद कल मुख्यमंत्री कार्यालय ने सात लोगों के दौरे से बाहर करने की जानकारी दी।
केवल मामूली समझौतों का किया खुलासा
आदित्य ठाकरे के पत्रकार परिषद में किए गए तीखे तंज के कारण घबराए मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जल्दबाजी में दावोस दौरे में केवल मामूली समझौतों की जानकारी दी और वहां हुए समझौतों की जानकारी का खुलासा किया है। विडंबना यह है कि एक ओर जहां उद्योग मंत्री ने प्रेस कॉन्फेंस में समझौतों के विवरण का खुलासा करने से इनकार कर दिया, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन विवरणों की घोषणा की, जिसकी जानकारी आदित्य ठाकरे ने ‘एक्स’ पर दी।

आदित्य ठाकरे के मुख्यमंत्री से सवाल
१) इस दौरे पर लगभग ५० लोग क्या करेंगे? उनके नामों की घोषणा करने से पहले ही हम नामों की घोषणा करें क्या?
२) ये ५० लोग दावोस में नहीं जा रहे हैं तो कल-परसों वे मुंबई में दिखेंगे क्या? अथवा वे गुपचूप दावोस जाएंगे? फिर भी उन्हें वहां कोई तो जरूर देखेगा ही।
३) मुख्यमंत्री को एक पीएस, एक पीए, सात ओएसडी, पांच बिना पद वाले व्यक्ति, दलाल और फिक्सर, तीन पीआरओ और प्रचारक की जरूरत क्यों है? वो भी ऐसी जगह जहां बहुत कठोर प्रतिबंध है!
४) उपमुख्यमंत्री स्वयं मौजूद नहीं रहते हैं तो मुख्यमंत्री को उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के साथ की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए?
५) वर्तमान सांसद और पूर्व सांसद भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। प्रतिनिधिमंडल में उनकी सटीक भूमिका क्या है?
६) समझौता करार पर हस्ताक्षर संबंधित विभाग के केवल एक अधिकारी की आवश्यकता होती है, पूरे लाव-लश्कर की नहीं।
७) उद्योग मंत्री ने कहा है कि कुछ लोग अपने खर्च पर दावोस जा रहे हैं! वाह! वास्तव में कौन हैं? उनके नाम और पद अथवा दावोस में उनकी जिम्मेदारियों की घोषणा की जानी चाहिए!

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