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बाघों को बचाने में असफल प्रशासन …पेंच में फिर हुई २ शावकों की मौत!

सामना संवाददाता / मुंबई
पेंच में एक बार फिर बाघ के दो शावकों की मौत हो गई है। हाल ही में यहां एक वयस्क बाघ की मौत हुई थी, जिसके बाद दो शावकों की मौत हुई है। मौत का कारण साफ नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों ने शावकों के शव का अंतिम संस्कार किया है। बाघों की हो रही मौत को लेकर प्रशासन पर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के पेंच व्याघ्र प्रकल्प पवनी एकसंघ बफर क्षेत्र में २७ व २८ अगस्त की रात एक-एक महीने के दो शावक वैâमरा ट्रैप में नजर आए थे। २९ अगस्त को सुबह फिर से पवनी एकसंघ खापा संरक्षण कुटी के पास दिखे। इसके बाद वे घने जंगल में चले गए। ऐसे में इनके लिए परिसर में वैâमरा ट्रैप लगाए गए थे। इन पर ध्यान रखने के लिए एक टीम का गठन भी किया गया था। २९ अगस्त की रात इसी दिशा में एक बाघ की दहाड़ सुनने को मिली थी। ३१ अगस्त को बगल में कक्ष क्रमांक २५५ व मायक्रोपहाड़ी परिसर में एक शावक के साथ बाघिन के पदचिह्न दिखाई दिए। ३ सितंबर को निरीक्षण टीम को कक्ष क्रमांक २५५ में उक्त २ शावक मृत अवस्था में दिखाई दिए। यहां बाघिन के पदचिह्न भी दिखाई दिए। इसी परिसर में ३ सितंबर को एक और बाघिन व तेंदुए के पदचिह्न दर्ज किए गए थे। यहां एक बाघ की भी मौजूदगी है। प्रभारी क्षेत्र संचालक व उपसंचालक डॉ. प्रभुनाथ शुक्ला व अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंच जांच की। परिसर को सील कर सबूत ढूंढ़ने की कोशिश की गई। एनटीसीए के प्रतिनिधि के उपस्थिति में शवविच्छेदन कर विसरा लिया गया, जिसे जांच के लिए भेजा गया है। दोनों शावकों के अंग सलामत हैं।

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