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धारा ३७० हटाने की बरसी पर अमरनाथ यात्रा को प्रशासन ने किया स्थगित

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू
आज जम्मू के बेस कैंप से श्रद्धालुओं का जत्था अमरनाथ गुफा की ओर रवाना नहीं किया गया है। जम्मू के जिला आयुक्त ने इस संबंध में देर रात को आदेश तो दिया था, पर रातभर सरकारी प्रवक्ता ऐसा कोई आदेश जारी होने से इंकार करते रहे। इतना जरूर था कि श्रीनगर से बालटाल और पहलगाम के लिए अमरनाथ श्रद्धालुओं को आगे जाने दिया गया था।

५ अगस्त, २०१९ को राज्य के दो टुकड़े करने और उसकी पहचान खत्म किए जाने की कवायद के बाद यह दूसरा अवसर था कि अनुच्छेद ३७० हटाए जाने की बरसी पर प्रशासन ऐसे कदम उठाने पर मजबूर हुआ था। हालांकि, पिछले साल उसने खराब मौसम का बहाना लगा ४ अगस्त को ही यात्रा को गैर सरकारी तौर पर खत्म कर दिया था, जबकि वर्ष २०२० और २०२१ में कोरोना के कारण अमरनाथ यात्रा संपन्न ही नहीं हो पाई थी।

अमरनाथ यात्रा को विभिन्न कारणों से स्थगित करने का सिलसिला कोई नया नहीं है। वर्ष २००८ में यह सिलसिला तब आरंभ हुआ था, जब अमरनाथ भूमि विवाद के चलते पूरे राज्य में पैâली हिंसा के चलते इसे कई दिनों तक रोके रखा गया था और वर्ष २०१६ की ८ जुलाई को हिज्बुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्याय बुरहान वानी की मौत का ‘डर’ इतना था कि वर्ष २०१८ तक उसकी बरसी पर लगातार कई दिनों तक यात्रा को स्थगित रखा जाता रहा है।

यात्रा स्थगन मेंं १३ जुलाई का दिन भी हर साल अक्सर जुड़ जाया करता था, जब कश्मीर के वर्ष १९३१ के शहीदों की याद में सरकारी समारोह मनाया जाता रहा था और जब-जब रक्षाबंधन १५ अगस्त के बाद आता है तो सुरक्षा के नाम पर इसे कई दिनों तक रोका जाता रहा है।

इस बार भी जम्मू के उपायुक्त ने यात्रा को अनुच्छेद ३७० को हटाए जाने की बरसी पर ‘खतरे’ को भांपते हुए रोके जाने का आदेश पारित कर यह संकेत स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश के हालात आज भी वैसे ही हैं।

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