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अजीत पवार के एक आदेश पर प्रशासन काम पर लगा …भाजपा-शिंदे गुट में बढ़ी अस्वस्थता

शिंदे गुट और भाजपा ने दी कोर्ट में जाने धमकी
दादा ने दी रुके हुए काम क़ो मंजूरी

सामना संवाददाता / मुंबई
जिला योजना समिति की निधि को लेकर एक ओर जहां भाजपा, शिंदे गुट और अजीत पवार गुट के महागठबंधन में चिंगारी भड़की हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जब आठ महीने पहले तत्कालीन पालक मंत्री द्वारा आयोजित योजना समिति की बैठक के मिनट तैयार नहीं थे, तो उपमुख्यमंत्री और जिला पालक मंत्री अजीत पवार ने प्रशासन को बैठक आयोजित किए बिना निधि के आवंटन में बदलाव करके रुके हुए कार्यों को मंजूरी देने का आदेश दिया था। नए पालकमंत्री के आदेशानुसार कार्रवाई की जा रही है और कार्यसूचियों को सीधे मंजूरी दी जा रही है। भाजपा और शिंदे गुट ने निधि आवंटन के इस तरीके पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट जाने की धमकी दी है और इससे जिले में विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की है। वहीं इस संदर्भ में प्रशासन तकनीकी मुद्दों के आधार पर खामी निकालने की चतुराई दिखा रहा है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला योजना समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित किया जाना अपेक्षित है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से जिले में एक नई पद्धति शुरू हुई है। साल में सिर्फ दो बैठकें हो रही हैं। १९ मई को तत्कालीन पालक मंत्री चंद्रकांत पाटील द्वारा आयोजित जिला योजना बैठक के बाद अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है। इस बैठक के मिनट्स की जानकारी सदस्यों को नहीं है। जिला परिषद के अनुसार, भाजपा के कई सदस्यों के आक्रामक रुख अपनाने के बाद, जिला योजना विभाग ने गुरुवार (२८ दिसंबर) को स्वीकृत कार्यों के सत्यापन के लिए जिला परिषद को दी गई सूची वापस ले ली है। साथ ही, कार्यों को मंजूरी देने का अधिकार अकेले पालक मंत्री को है या नहीं, इस संबंध में भी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
तत्कालीन पालकमंत्री चंद्रकांत पाटील द्वारा स्वीकृत कार्य नियमानुसार हैं। हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायकों और अजीत पवार गुट के आदेश पर इन सूचियों को बदलने और ९० प्रतिशत निधि आवंटित करने की योजना बनाई गई है। इन कार्यों की सूचियां जिला परिषद को भेज दी गई हैं।

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