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एडमिशन तो हुआ, पर बच्चे स्कूल आते हैं या नही, शिक्षा विभाग को पता नहीं

फिर हो रही है सर्वेक्षण की तैयारी, १७ से ३१ अगस्त तक शिक्षा विभाग की पुन: खोज मुहिम
सामना संवाददाता / मुंबई
शिक्षा विभाग द्वारा अप्रैल २०२३ में किए गए सर्वेक्षण में स्कूल से दूर रहनेवाले विद्यार्थियों की जानकारी सामने आई थी। इसमें राज्य में ६ से १४ वर्ष की आयु के ८,१४३ बच्चे स्कूल से दूर हो गए थे। शिक्षा से वंचित इन सभी का फिर से स्कूलों में एडमिशन तो करा दिया गया, लेकिन इनमें से कितने बच्चे फिर से स्कूल लौटे? क्या ये बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं? इनकी शैक्षणिक प्रगति कैसी हो रही है, इसकी कोई जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है। ऐसे में अब १७ से ३१ अगस्त से प्राथमिक शिक्षा निदेशालय एक बार फिर से राज्य में स्कूल से बाहर, अनियमित और प्रवासी बच्चों को शिक्षा की धारा में लाने के लिए शिक्षा की प्रवाह से अलग हुए बच्चों का सर्वेक्षण करने जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से हर साल स्कूल न जानेवाले छात्रों का सर्वेक्षण किया जाता है। इस वर्ष भी यह अभियान प्रदेश भर के सभी विभागीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालयों के अंतर्गत चलाया जाएगा। इस अभियान को शुरू करने से पहले शिक्षा विभाग ने १८ अप्रैल को राज्य में ६ से १४ साल के स्कूल न जानेवाले बच्चों के आंकड़े जारी किए थे। उस समय स्कूल न जानेवाले बच्चों की सबसे अधिक संख्या ठाणे जिले में पाई गई थी। इसके बाद मुंबई, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर का स्थान था। यह बात भी सामने आई है कि जून से इनमें से कितने बच्चे स्कूल जा रहे हैं, इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है। राज्य के १८ जिलों में १०० से अधिक बच्चे स्कूल से दूर हैं और शेष जिलों में यह संख्या ९० के आसपास है।
जिलेवार स्कूल न जानेवाले बच्चों की संख्या
स्कूल न जानेवाले बच्चों की संख्या नगर ११३, अकोला ३४०, अमरावती १९८, छत्रपति संभाजीनगर ८००, भंडारा १७, बीड १५३, बुलढाणा ६४, चंद्रपुर १३, धुले ४७२, गढ़चिरौली ३५, गोंदिया ८०, हिंगोली ७८, जलगांव ४०१, जालना १००, कोल्हापुर ६९, लातूर ११, मुंबई उपनगर ६५२, मुंबई शहर ४९१, नागपुर ११०, नांदेड़ १९, नंदुरबार २४९, नासिक ३८०, धाराशिव २५, पालघर ३०९, परभणी १२१, पुणे ८१७, रायगड १७४, रत्नागिरी ४५, सांगली ९१, सतारा ४०, सिंधुदुर्ग ४५, सोलापुर ६७, ठाणे १,४०१, वर्धा ३४, वाशिम ४८, यवतमाल ८१ है।
सर्वेक्षण अभियान की गंभीरता हुई खत्म
स्कूल से बाहर खोज मुहिम के दौरान पाए गए बच्चों को ही स्कूल में प्रवेश दिया जाता है और उनका नाम उपस्थिति पंजिका में दर्ज किया जाता है। स्कूलों पर इन बच्चों की प्रतिदिन उपस्थित दर्ज कराने को लेकर कोई बाध्यता नहीं है। इन बच्चों के लिए आरटीई में विशेष प्रावधान है और ये बच्चे पढ़-लिख सकें, इसके लिए स्कूलों को विशेष प्रयास करने की जरूरत है, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है इसलिए इस अभियान में गंभीरता नहीं रह गई है।
-हेरंभ कुलकर्णी, शिक्षाविद

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