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आडवाणी अड़े अयोध्या जाऊंगा ही! … जोशी भी जिद पर कायम … राम मंदिर आंदोलन के पुरोधाओं को नजरअंदाज करना चाहती थी भाजपा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अगले महीने अयोध्या के निर्माणाधीन राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह आयोजित किया गया है। इसमें देशभर के हजारों साधु-संतों व मशहूर हस्तियों को निमंत्रित किया गया है। पर लोगों की निगाहें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की ओर लगी हुई हैं। ये दोनों ही नेता वयोवृद्ध हैं और राम मंदिर आंदोलन के इन पुरोधाओं को भाजपा नजरअंदाज करना चाहती थी। पर विहिप ने इन्हें औपचारिक निमंत्रण पत्र सौंपकर इन्हें लाइमलाइट में ला दिया है। हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन दोनों से न आने का आग्रह किया है, पर आडवाणी इस बात पर अड़ गए हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं अयोध्या जाऊंगा ही। इसके साथ ही मुरली मनोहर जोशी भी अयोध्या जाने की जिद पर कायम हैं।
बता दें कि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बार-बार कह रहे हैं कि दोनों वरिष्ठ नेताओं की उम्र और स्वास्थ्य की वजह से उनके समारोह में आने की संभावना कम ही है। चंपत राय ने बताया, ‘दोनों नेता परिवार के बड़े हैं और उनकी उम्र को देखते हुए, उनसे समारोह में न आने के लिए कहा गया है। चंपत राय ने कहा कि १५ जनवरी तक तैयारियां पूरी हो जाएंगी और ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए पूजा १६ जनवरी से शुरू होकर २२ जनवरी तक चलेगी। आडवाणी के अयोध्या जाने के मामले पर चंपत राय ने कहा, ‘आडवाणी जी का होना अनिवार्य है, लेकिन हम ये भी कहेंगे उनसे कि वे न आएं। डॉक्टर जोशी से मेरी सीधी बात हुई है। मैं यही कहता रहा कि आप मत आइए लेकिन उन्होंने तो मानो संकल्प कर रखा है कि वो जाएंगे ही। मैं बार-बार कहता रहा कि आपकी आयु अधिक है, सर्दी है और आपने घुटने भी बदलवाए हैं।’ आडवाणी अभी ९६ साल के हैं और मुरली मनोहर जोशी अगले महीने ९० वर्ष के हो जाएंगे। मुरली मनोहर जोशी ने भी अयोध्या जाने की जिद पकड़ रखी है। गौरतलब है कि ये आडवाणी ही थे जिन्होंने भाजपा के राम मंदिर आंदोलन को गति दी थी जिससे लोकसभा में २ सीटों वाली भाजपा का ग्राफ तेजी से बढ़ा और वह १९८९ में ८५ सीटों पर पहुंच गई थी। इसके बाद रथयात्रा शुरू हुई और अगले चुनाव में भाजपा १२० सीटों पर पहुंच गई। मगर भाजपा में मोदी-शाह युग के शुरू होने के बाद आडवाणी और जोशी की पार्टी में उपेक्षा होने लगी और उन्हें मार्गदर्शक मंडल में डालकर उनके राजनीतिक सफर को विराम लगा दिया गया।

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