मुख्यपृष्ठखबरेंआशियाने पर पड़ा असर!... रूस-यूक्रेन के युद्ध से भड़की महंगाई

आशियाने पर पड़ा असर!… रूस-यूक्रेन के युद्ध से भड़की महंगाई

• अचानक बढ़ गए सरिया-सीमेंट के भाव
• सरिया के दाम २५ फीसदी बढ़े
• सीमेंट और पेंट भी हुआ महंगा

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर। रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध का असर अब हिंदुस्थान में अपने घर का सपना रखनेवालों पर भी पड़ने लगा है। इस संकट की वजह से लोहे की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। पिछले करीब दो हफ्ते में लोहे के भाव में बढ़ोतरी हुई है। इस युद्ध से पहले ६० रुपए प्रति किलो बिकनेवाला सरिया अब ८२ रुपए किलो बिक रहा है। सीमेंट का भी भाव बढ़कर ४०० का आंकड़ा छूने को उतावला है।
पालघर में निर्माण सामग्री के व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों के अनुसार निर्माण क्षेत्र में बढ़ती महंगाई से घर बनाने का सपना देख रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
लोहा का दाम बढ़ने से हाहाकार मच गया है। सरिया से लेकर लोहे की तमाम वस्तुएं महंगी होने लगी हैं। इसके अलावा अन्य सामग्री के अचानक दाम बढ़ने से घर बनाने जा रहे लोगों का बजट बिगड़ गया है। बिल्डर स्वामीदयाल सिंह का कहना है कि निर्माण सामग्री में अचानक वृद्धि हो गई है, जिससे सपनों का घर बनाने में लोगों को अब ज्यादा लागत लगानी पड़ रही है। महंगाई बढ़ने से लोगों के जनजीवन पर बुरा प्रभाव पड़ने लगा है। लोगों को अंदेशा है कि सरिया सीमेंट, र्इंट का भाव और बढ़ सकता है। सरिया की कीमतों में २५ फीसदी तक का इजाफा हुआ है। रूस का हमला शुरू होने से पहले ६० रुपए प्रति किलो बिकनेवाला सरिया अभी ८२ रुपए तक में बिक रहा है। सीमेंट, पेंट और केमिकल के दाम भी बढ़ रहे हैं। पेंट में यूज होनेवाला केमिकल यूक्रेन व दूसरे देशों से आता है। क्रूड उच्च स्तर पर है। शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से पेंट भी महंगे हो रहे हैं। बढ़ती महंगाई के कारण कई बिल्डर भी मुश्किल में हैं और वह अपने प्रोजेक्ट पर काम रोकने तक विचार कर रहे हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो महंगाई और १० से २५ फीसदी तक बढ़ जाएगी। अनुमान के अनुसार अगर १० एमएम सरिया का इस्तेमाल करें तो १,००० स्क्वायर फीट की छत की ढलाई में ही कम से कम १,०५० किलो सरिया लगता है। यानी १५,७५० रुपए का ज्यादा बोझ पड़ेगा। दरअसल, इन दोनों देशों से सप्लाई रुकी तो हिंदुस्थान के निर्यातकों ने विदेशों में लोहा-कोयला भेजना शुरू कर दिया। इससे घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ गई है।
पालघर जनजातीय बाहुल्य जिला है। यहां के आदिवासी पक्के घर के लिए सरकारी योजनाओं पर आश्रित रहते हैं। सरकारी आवास योजना के ग्रामीण हितग्राहियों को अब पक्का घर बनाने में पसीना छूट रहा है। निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों ने आवास के कामों में रोड़ा अटका दिया है। लोहे के बढ़े दामों ने जहां लोगों के अपने घर के सपने को तोड़कर चकनाचूर कर दिया है, वहीं सरकारी योजना से बनने वाले आवास की गति भी धीमी पड़ गई है। जिले में बहुत से लोगों ने तो लोहा सस्ता होने के इंतजार में निर्माण कार्य ही रोक दिया है। जानकारों का कहना है कि लोहा, र्इंट, रेत, गिट्टी की कीमतों में हो रही वृद्धि के चलते निर्माण कार्यों की रफ्तार थमेगी।
• एक महीने पहले निर्माण सामग्री की कीमत कम थी। लेकिन अब सरिया सीमेंट सहित अन्य सामग्रियों के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। बढ़ती कीमतों के कारण कम कीमतों पर सामान बेचना मुश्किल हो रहा है।
-संदीप पाटील, निर्माण सामग्री डीलर

• घर बनाने के लिए ईंट की व्यवस्था कर ली है। लेकिन सरिया, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री के अचानक भाव आसमान छूने से घर के निर्माण का बजट बिगड़ गया है।
-संदेश भोये, घरकुल लाभार्थी

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