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३३ साल बाद ३५० यात्री मांगेंगे … हाईजैक का हिसाब!

सद्दाम हुसैन के कार्यकाल की त्रासदी पर ब्रिटिश सरकार कानूनी अड़चन में
३३ साल बाद ३५० लोग एक कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। यह मामला इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन से जुड़ा हुआ है। हालांकि, सद्दाम हुसैन अब इस दुनिया में नहीं हैं। अमेरिका ने सद्दाम को फांसी दे दी थी। यह मामला १९९१ का है जब इराक और अमेरिका के बीच लड़ाई छिड़ी थी। तब सद्दम ने ब्रिटिश एयरवेज के एक यात्री विमान को हाईजैक कर लिया था। वह विमान और उसके यात्री ४ महीने तक सद्दाम के कब्जे में थे। अब ३३ साल बाद ये यात्री ब्रिटिश सरकार व एयरलाइंस कंपनी ब्रिटिश एयरवेज से हाईजैक का हिसाब मांगनेवाले हैं। सद्दाम के कार्यकाल की इस त्रासदी पर ब्रिटिश सरकार कानूनी अड़चन में आ सकती है।
१९९१ में तत्कालीन इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन द्वारा हाईजैक की गई ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में सवार रहे यात्रियों और फ्लाइट के क्रू मेंबर्स ने अब कानूनी लड़ाई लड़कर इंसाफ हासिल करने की राह अपनाई है। ३३ साल के बाद ये लोग अब न सिर्फ एयरलाइंस कंपनी ब्रिटिश एयरवेज के खिलाफ, बल्कि यूनाइटेड किंगडम की सरकार के खिलाफ भी मुकदमा करने वाले हैं। पुराने जख्मों को जब छेड़ दिया जाता है तो ये बहुत दुख देते हैं, ऐसे में इनका इलाज करना लाजिमी हो जाता है। ऐसी एक स्थिति अब उन लोगों के लिए बन गई है, जिन्होंने आज से लगभग ३३ साल पहले बिना किसी कसूर ४ महीने का लंबा वक्त कैद में गुजारा था। मामला १९९१ में तत्कालीन इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन द्वारा ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट को हाईजैक करने का है। उस फ्लाइट में सवार रहे यात्रियों और फ्लाइट के क्रू मेंबर्स ने अब कानूनी लड़ाई लड़कर इंसाफ हासिल करने की राह अपनाई है। पता चला है कि ये लोग अब न सिर्फ एयरलाइंस कंपनी ब्रिटिश एयरवेज के खिलाफ, बल्कि यूनाइटेड किंगडम की सरकार के खिलाफ भी मुकदमा करने वाले हैं।
१९९१ में अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र सेना के हमले से बचने के लिए सद्दाम हुसैन ने ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट बीए-१४९ को।
घटना के पीड़ितों ने अब ब्रिटिश एयरवेज कंपनी और ब्रिटेन की सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का मन बनाया है।
बता देना जरूरी है कि २ अगस्त १९९० को खाड़ी देश इराक ने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला किया था। संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद ने इराक पर कई पाबंदियां लगार्र्इं, लेकिन जब इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने १५ जनवरी १९९१ की डेडलाइन को अनदेखा कर दिया तो अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र सेना ने इराक पर हमला कर दिया। उसी दौरान सद्दाम हुसैन ने ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट को हाईजैक कर लिया और इसमें सवार लोगों को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। इसके बाद इस फ्लाइट में मौजूद ३६७ यात्रियों और चालक दल के कुछ सदस्यों ने चार महीने से ज्यादा का समय वैâद में बिताया।
गत मंगलवार को एक कानूनी फर्म ने जानकारी दी कि ३३ साल पुरानी प्लेन हाईजैक की घटना के पीड़ितों ने अब ब्रिटिश एयरवेज कंपनी और ब्रिटेन की सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का मन बनाया है।

सरकार को पता था
यात्रियों का प्रतिनिधित्व करते हुए मैक्यू जूरी एंड पार्टनर्स ने कहा कि पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इनकी मानें तो यूनाइटेड किंगडम की सरकार और एयरलाइंस कंपनी को हमले के बारे में जानकारी थी, लेकिन फिर भी फ्लाइट को उतरने की अनुमति दी गई। ऐसा करने के पीछे की वजह ‘उड़ान का इस्तेमाल कुवैत में पूर्व विशेष बलों और सुरक्षा सेवाओं की एक ब्लैक ऑप्स टीम को शामिल करने के लिए किया जाना’ रहा। बंधक रह चुके लोगों के पास इस बात के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। उनकी मांग है कि जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।

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