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कोरोना के बाद केरल से फूटा निपाह का कहर! …संक्रमितों के संपर्क में आए १,०८० लोग

• कोझिकोड में २४ सितंबर तक स्कूल बंद
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
हिंदुस्थान में कोरोना ने पहली दस्तक केरल में दी थी। अब चार साल बाद एक और खतरनाक वायरस निपाह ने भी केरल में ही दस्तक दी है। केरल के कोझिकोड में ‘निपाह’ वायरस के मामले सामने आने के बाद से डर का माहौल है। निपाह वायरस को देखते हुए कोझिकोड में सभी शिक्षण संस्थानों को २४ सितंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है। इसमें स्कूल, प्रोफेशनल कॉलेज और कोचिंग सेंटर्स शामिल हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि पूरे हफ्ते सभी शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन क्लास करवाई जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान में निपाह वायरस से संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या १,०८० हो गई है। इसमें से १३० लोग ऐसे हैं, जिन्हें शुक्रवार को ही लिस्ट में शामिल किया गया है। सभी १,०८० लोगों में से ३२७ लोग हेल्थ वर्कर्स हैं। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि अन्य जिलों में कुल २९ लोग निपाह संक्रमित लोगों की कॉन्टैक्ट लिस्ट में हैं। इनमें २२ मलप्पुरम से, एक वायनाड से और तीन-तीन कन्नूर और त्रिशूर से हैं।
अब तक ६ केस
हाई-रिस्क कैटेगरी में १७५ लोग सामान्य नागरिक हैं, जबकि १२२ हेल्थकेयर वर्कर्स हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने ये भी बताया है कि कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल लोगों की संख्या बढ़ सकती है। उनका कहना है कि ३० अगस्त को जान गंवाने वाले व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जिसकी वजह से राज्य में निपाह के केस बढ़ गए हैं। अभी तक राज्य में निपाह वायरस के छह केस रिकॉर्ड किए गए हैं। केरल में सामने आए इस वायरस की वजह से डर का माहौल बना हुआ है।
मिली जानकारी के मुताबिक, ३० अगस्त को जान गंवाने वाले व्यक्ति के अंतिम संस्कार में कम से कम १७ लोग शामिल हुए। इन सभी लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है। निपाह वायरस से संक्रमित चार लोग ऐसे हैं, जिनका अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। निपाह मामलों का इलाज कर रहे सभी अस्पतालों को मेडिकल बोर्ड बनाने की सलाह दी गई है। इस बोर्ड की बैठक दिन में दो बार की जाएगी। इसके बाद बनी रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग को सौंपने को कहा गया है। जिला कलेक्टर ने राज्य के ‘संक्रामक रोग नियंत्रण प्रोटोकॉल’ के आधार पर इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

चमगादड़-सूअर से फैलता है
निपाह वायरस चमगादड़ों और सूअर के जरिए इंसानों में फैल सकता है। जानवरों से इंसानों में होने वाली बीमारी को जूनोटिक डिजीज कहा जाता है। निपाह वायरस बुखार की तरह आता है। कई लोगों को शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते, केवल सांस लेने में दिक्कत होती है। सिर-दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी भी हो सकती है। लेकिन लंबे समय तक मरीज में ये इंफेक्शन रह जाए तो एन्सेफेलाइटिस यानी दिमागी बुखार में बदल जाता है और जानलेवा हो सकता है।

कोरोना से ७० फीसदी ज्यादा खतरनाक
निपाह वायरस को कोरोना से भी ७० फीसदी ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव बहल ने साफ कहा है कि निपाह वायरस ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि निपाह वायरस के संक्रमण की रफ्तार कोरोना वायरस की तुलना में काफी कम होती है और यह केवल तभी पैâल सकता है, जब आप संक्रमित मरीज के बॉडी फ्लूइड, जैसे कि खून, सलाइवा या मल-मूत्र के संपर्क में आ जाएं या फिर बहुत लंबे समय तक ऐसे मरीज के बेहद नजदीक रहे हों।

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