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हिंडन के बाद, `हिडन’बर्ग! …अडानी पर एक और आरोप, शेयरों में गड़बड़ी का संदेह

एजेंसी / नई दिल्ली
गौतम अडानी के स्वामित्व वाले अडानी ग्रुप पर एक बार फिर बम फूटा है। दरअसल, हिंडनबर्ग के बाद अब `हिडन’बर्ग सामने आया है। अडानी पर एक और आरोप लगा है, उन पर शेयरों में गड़बड़ी करने का संदेह है। ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) ने एक फ्रेश रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि अडानी ग्रुप ने गुपचुप तरीके से खुद अपने ही शेयर खरीदकर स्टॉक एक्सचेंज में लाखों डॉलर का निवेश किया। ओसीसीआरपी ने इसमें अडानी ग्रुप के मॉरीशस में किए गए ट्रांजैक्शंस की डिटेल्स का भी खुलासा करने का दावा किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रुप कंपनियों ने २०१३ से २०१८ तक गुपचुप तरीके से अपने शेयरों को खरीदा था। ओसीसीआरपी का दावा है कि उसने मॉरीशस के रास्ते हुए ट्रांजैक्शंस और अडानी ग्रुप के इंटरनल ईमेल्स को देखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में सामने आया है कि कम से कम दो मामले ऐसे हैं, जहां निवेशकों ने विदेशी कंपनियों के जरिए अडानी ग्रुप के शेयर खरीदे और बेचे हैं।
गुरुवार को आई ओसीसीआरपी की रिपोर्ट में दो निवेशकों में नसीर अली शाबान अहली और चांग चुंग-लिंग का नाम शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये लोग अडानी परिवार के लॉन्गटाइम बिजनस पार्टनर्स हैं। ओसीसीआरपी ने दावा किया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चांग और अहली ने जो पैसा लगाया है वह अडानी परिवार ने दिया था, लेकिन रिपोर्टिंग और डॉक्यूमेंट्स से साफ है कि अडानी ग्रुप में उनका निवेश अडानी परिवार के साथ सामंजस्य के साथ किया गया था।

जॉर्ज का विवादों से पुराना नाता
अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस का विवादों से पुराना नाता रहा है। वो प्रधानमंत्री मोदी को लेकर पहले भी विवादित बयान देते रहे हैं। केवल पीएम मोदी पर ही नहीं बल्कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप पर भी विवादित बयान दिए हैं। सोरोस पर अलग-अलग देशों की राजनीति और कारोबार को प्रभावित करने के लिए अपनी दौलत का इस्तेमाल करने का आरोप लगता रहा है।

कौन है ओसीसीआरपी
आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) खोजी पत्रकारों का एक ग्लोबल नेटवर्क है। ओसीसीआरपी की स्थापना साल २००६ में हुई थी। ओसीसीआरपी का गठन एशिया, यूरोप, अप्रâीका और लैटिन -अमेरिका में पैâले २४ गैर-लाभकारी जांच केंद्रों ने किया है। ओसीसीआरबी को अरबपति इंवेस्टर जॉर्ज सोरोस और रॉकफेलर ब्रदर्स फंड जैसे लोगों से फंडिंग मिलती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्ज सोरोस को मोदी सरकार का कट्टर विरोधी माना जाता है। वे समय-समय पर मोदी सरकार की आलोचना करते रहते हैं। जॉर्ज अपनी इकाई ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के माध्यम से ओसीसीआरपी की फंडिंग करते हैं। इसके अलावा फोर्ड फाउंडेशन, रॉकफेलर ब्रदर्स फंड और ओक फाउंडेशन से भी ग्रुप को फंडिंग मिलती है।

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