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परीक्षाओं में नकल के बढ़ते चलन के बाद अब होश में आई घाती सरकार!

-नकल को रोकने के लिए किए जा रहे उपाय 

-बोर्ड परीक्षा में पानी पहुंचाने पर लगी रोक

सामना संवाददाता / मुंबई

देश के पिछड़े राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल का चलन बढ़ा है। परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा नकल करते हुए पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद अब जाकर ‘घाती’ सरकार होश में आई है। इस संदर्भ में अब कड़े नियम बनाए जा रहे हैं, जिसके तहत नकल कराने में मदद करनेवालों पर नकेल कसने के लिए कक्षाओं में पानी पहुंचाने वालों पर भी रोक लगा दी गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों में १०वीं और १२वीं बोर्ड परीक्षा में नकलचियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल, बोर्ड ने इसका पता लगा लिया है कि छात्रों तक नकल वैâसे पहुंच रही है? बताया गया है कि यह बात सामने आ चुकी है कि परीक्षा के दौरान ज्यादातर नकल के चिट क्लास में पानी देनेवाले व्यक्ति के जरिए ही पहुंच रही हैं। इसलिए इस साल पानी बांटने वाले व्यक्ति को ही क्लास में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। साथ ही अगर किसी छात्र के हाथ में किसी अन्य विषय की कॉपी मिलती है, तो उस छात्र को नई उत्तर पुस्तिका देकर पेपर हल करने को कहा जाएगा।
प्रश्नपत्र पैकेट को बदलने का लिया गया निर्णय
नासिक बोर्ड के संयुक्त सचिव मछिंद्र कदम का कहना है कि बोर्ड पहली बार प्रथम भाषा विषयों के लिए पहले दिन नारंगी रंग के पैकेट का उपयोग करेगा, ताकि प्रश्न पत्र पैकेट को लेकर कोई भ्रम न हो। अब तक बोर्ड द्वारा सभी प्रश्नपत्र खाकी रंग के लिफाफे में भेजे जाते थे। लेकिन इससे अक्सर भ्रम की स्थित पैदा हो जाया करती थी। इसमें भी भाषा को लेकर ज्यादा गड़बड़ी हुआ करती थी। मराठी में हिंदी के पैकेट हुआ करते थे। इसलिए अब असमंजस को कम करने के लिए बोर्ड ने प्रथम भाषा के सभी विषयों के प्रश्न पत्र नारंगी लिफाफे में भेजने की तैयारी की है, और बाकी पैकेट खाकी रंग के होंगे।
पेयजल की व्यवस्था बंद 
१२वीं की बोर्ड परीक्षा २१ फरवरी से और १०वीं की बोर्ड परीक्षा एक मार्च से शुरू होगी। नकलचियों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए बोर्ड की ओर से कई उपाय किए जा रहे हैं। बोर्ड ने भयमुक्त माहौल में परीक्षा आयोजित करने की अपील करते हुए कुछ नियम और शर्तें भी रखी हैं। छात्रों को मुख्य रूप से घर से पानी की बोतलें लाने के लिए कहा गया है। साथ ही पानी की बोतल पारदर्शी होनी चाहिए। परीक्षा केंद्र पर पानी का जार भी रखा जाएगा। हालांकि कक्षा में पेयजल की व्यवस्था बंद कर दी गई है।

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