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फिर चाकूबाजी हुई कश्मीर में, 10 महीनों में 20 से अधिक मामले सामने आए 

-‘चाकूबाज’ कश्मीर में 9 इंच से बड़े और 2 इंच से अधिक चौड़े चाकू पहले ही प्रतिबंधित

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

कश्मीर में चाकू से हमले के एक ताजा मामले में श्रीनगर के मंदर बाग इलाके के शफत अहमद नामक एक युवक पर अज्ञात व्यक्तियों ने चाकू से हमला कर घायल कर दिया। उसे तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वे इस चाकूबाजी की घटना के तथ्यों की जांच कर रहे हैं। गुरुवार शाम को भी बाबर लाइन के पास तेज धार वाले हथियार से वार कर बुम्हामा कुपवाड़ा निवासी गुलाम कादिर डार के बेटे मुनीर अहमद डार नामक युवक को घायल कर दिया गया था।
हालांकि, आपके लिए यह एक सामान्य और मामूली खबर हो सकती है, पर कश्मीर के लिए यह एक अति गंभीर मसला बन चुका है। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर में चाकू अब एक नया हथियार बन जाने के कारण प्रशासन ने 22 जुलाई 2023 को 9 इंच से बड़े और 2 इंच से अधिक चौड़े तेजधार चाकुओं व अन्य हथियारों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी।
दरअसल, पिछले 10 महीनों मे 20 से अधिक मामने कश्मीर में चाकूबाजी के हो चुके हैं। जो कश्मीरी कभी कांगड़ी को हथियार बना एक दूसरे से लड़ा करते थे, वे अब चाकू को अपना साथी बना चुके हैं। यह बात अलग है कि कश्मीर में आज भी 33 सालों के आतंकवाद के दौर में एके-47 जैसी राइफलों का बोलबाला है।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान 20 से अधिक चाकूबाजी के मामलों के कारण कश्मीर अब ‘चाकूबाज कश्मीर’ के नाम से भी मशहूर होने लगा था। इन घटनाओं में 15 लोग जख्मी हुए हैं तो 5 की मौत भी हो चुकी है। एक मामले में तो एक नाबालिग ने अपनी गर्लफ्रेंड के बाप की हत्या चाकू से इसलिए कर दी थी, क्योंकि लड़की के बाप को दोनों का साथ गंवारा नहीं था।
10 महीनों में जो 20 से अधिक चाकूबाजी के मामले कश्मीर में आए हैं, उनमें से अधिकतर प्रेस प्रसंग के थे या फिर लड़कियों को लेकर थे। यही नहीं एक मामले में तो एक युवा युवती ने भी अपने मंगेतर को चाकू मारकर जख्मी कर दिया था। ये युवती एक स्थानीय अखबार में बतौर पत्रकार कार्य करती है। हालांकि, प्रशासन 9 इंच से बड़े और 2 इंच से अधिक चौड़े धारदार तेज हथियारों की सार्वजनिक बिक्री पर प्रतिबंध लगा चुका है, पर चाकूबाजी के हमले रूकने का नाम नहीं रहे हैं। ताजा दो घटनाएं इसकी पुष्टि जरूर करती थीं।

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