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एआई ने बताया डरावना भविष्य! बढ़ सकती है बेरोजगारी! … आलसी बन सकती है नई पीढ़ी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रचलित हो गया है और इससे कई लाभ हुए हैं। एआई की सबसे बड़ी खासियत स्वचालन है और इसका संचार, परिवहन, उपभोक्ता उत्पादों और सेवा उद्योगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग हमेशा बेहतर पैâसले लेने के लिए किया जाता रहा है। एआई तकनीक, डेटा डिलिवरी का समन्वय कर सकती है, रुझानों का विश्लेषण कर सकती है, पूर्वानुमान प्रदान कर सकती है और सबसे बेस्ट पैâसले में मदद कर सकती है। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में नए-नए खोजों में मदद करना, रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाने से लेकर एआई कई मायनों में काफी उपयोगी है। हालांकि एआई के कई तरह के फायदे हैं तो इसके नुकसान भी हैं। जानकारों के मुताबिक, ये बेरोजगारी बढ़ा सकती है और निजता को खत्म करके आनेवाली पीढ़ी को आसली बना सकती है।
निजी सुरक्षा पर खतरा
जहां एक ओर एआई निजी सुरक्षा के लिए मददगार साबित हो सकता है तो वहीं यही सिस्टम निजी सुरक्षा को नुकसान भी पहुंचा सकता है क्योंकि पूरा एआई सिस्टम डेटा पर निर्भर होगा, इसलिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों की प्राइवेसी पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
नहीं होंगी मानवीय संवेदनाएं
एआई में मानवीय संवेदनाएं नहीं होंगी, इसलिए इस तरह के मामलों में इसका इस्तेमाल करना घातक साबित हो सकता है। साथ ही इस पर बहुत ज्यादा निर्भर रहना भी नुकसानदेह हो सकता है। ये इंसान को आलसी बना सकता है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।

नौकरियां खत्म होने का खतरा
एआई में पारंपरिक रूप से किए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करने की क्षमता है, जिससे कुछ उद्योगों में लोगों की नौकरियां जा सकती हैं और बेरोजगारी पैदा हो सकती है। जैसे- कस्टमर सपोर्ट के लिए बनाए गए चैटबोट अगर १०० फीसदी सफल होते हैं तो कंपनियां इसके लिए नौकरियां निकालना बंद कर देंगी। इसी तरह का खतरा दूसरी कई नौकरियों के साथ भी है। सबसे ज्यादा खतरा फिल्मिंग और ग्राफिक डिजाइनिंग से जुड़े लोगों पर होगा, क्योंकि इस फील्ड में तेजी से एआई का इस्तेमाल हो रहा है और इसके नतीजे भी आश्चर्यजनक हैं।

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