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हवा, हवाई हो गई हवाई यात्रा! … फ्लाइट कैंसिल होने से यात्रीगण हो रहे परेशान! …एयरलाइंस कंपनियों पर फर्जी कारण बताने का आरोप

९० प्रतिशत यात्री चाहते हैं सरकार उन्हें मुआवजा दिलाए
अभिषेक कुमार पाठक / मुंबई
बीते दिनों से ट्रेन और फ्लाइट से यात्रा में देरी हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। एयरलाइंस द्वारा देरी की वजह कोहरे को बताया जा रहा है, लेकिन यात्रा करनेवाले यात्रियों का दावा है कि एयरलाइंस अपने आंतरिक दिक्कतों को छुपाने के लिए कोहरे का बहाना दे रही हैं। साल की शुरुआत में कोहरे और अन्य परिचालन संबंधी मुद्दों के कारण कई फ्लाइट रद्द होने और देरी की बड़ी संख्या में शिकायतों के बीच केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस ऑपरेटरों और प्रतिनिधियों से यात्रियों के साथ उचित न्याय करने की बात कही थी। दिसंबर २०२३ में, सरकार ने उड़ान रद्द होने और देरी की स्थिति में हवाई यात्रियों को दिए जानेवाले मुआवजे के बारे में एयरलाइंस को दिशा-निर्देश जारी किए थे। हाल ही में लोकल सर्कल की सर्वे की एक रिपोर्ट में सामने आया कि १० में से ९ यात्री चाहते हैं कि सरकार ऐसे मामलों में एयरलाइंस को यात्रियों को जुर्माना देना के लिए बाध्य करे।
व्यर्थ हुए सभी प्रयास
एविएशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एयरलाइंस ऑपरेटरों और उनके प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग की थी, जिसके दौरान उन्हें उड़ान रद्द करने या देरी के मामले में नागर विमानन आवश्यकताओं (सीएआर) और रिफंड नीतियों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया था। लेकिन ये सभी प्रयास व्यर्थ प्रतीत होते हैं क्योंकि विभिन्न हवाई अड्डों, विशेष रूप से उत्तरी राज्यों में हजारों यात्रियों को स्थिति के बारे में सीमित जानकारी के साथ उड़ानों में देरी या रद्द होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। बीते दिनों में दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, गुवाहाटी आदि सहित कई हवाई अड्डों पर यात्री फंसे हुए थे। सोशल मीडिया पर तस्वीरें, वीडियो क्लिपिंग और शिकायतें यात्रियों द्वारा लगातार शेयर की गर्इं है।
क्या है लोगों की मांग
लोकल सर्कल ने आंतरिक कारणों से एयरलाइंस द्वारा उड़ान रद्द करने या रिशिड्यूल करने पर यात्रियों की दिक्कतों को समझने के लिए एक सर्वे किया। सर्वे को देश के ३१८ से अधिक जिलों में स्थित हवाई यात्रियों से २३,००० प्रतिक्रियाएं मिलीं। ६१ फीसदी उत्तरदाता पुरुष थे जबकि ३९फीसदी उत्तरदाता महिलाएं थीं। ४६फीसदी उत्तरदाता टियर १ से, ३४ फीसदी टियर २ से और २०फीसदी उत्तरदाता टियर ३, ४ और ग्रामीण जिलों से थे। १० लोगों में से ९ चाहते हैं कि सरकार ऐसे मामलों में एयरलाइंस को यात्रियों को मुआवजा देना के लिए बाध्य करे।

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