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हवा में हवाई एंबुलेंस!

• केवल कागजों पर सिमटी यह योजना
• राज्य सरकार ने तय नहीं की है स्पष्ट नीति
• कम खर्चीली है योजना
• निधि का है बहुत अभाव

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में सड़क हादसों के दौरान बड़ी संख्या में घायल लोगों की मौतें केवल इसलिए हो जाती हैं क्योंकि उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। इस तरह के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि महाराष्ट्र में इस तरह से होनेवाली मौतों को रोकने और घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल तक पहुंचाने के लिए लाई गई एयर एंबुलेंस नीति आज भी कागजों पर सिमट कर रह गई है। `ईडी’ सरकार द्वारा नीति को स्पष्ट न किए जाने से हवाई एंबुलेंस आज भी हवा में लटक कर रह गई है।

ज्ञात हो कि बीते एक दशक के दौरान सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल आम से खास तक सभी की मौतें केवल समय पर इलाज न मिलने से हुई हैं। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में एक सड़क हादसे में विनायक मेटे की इलाज के अभाव में हुई मौत है। हालांकि ऐसे नेताओं और खास व्यक्तियों की मौत होने के बाद ट्रामा केयर अस्पताल शुरू करने से लेकर हवाई एंबुलेंस के मुद्दे उठने लगते हैं लेकिन समय बीतने के साथ ही लोग इसे भूलने लगते हैं। फिलहाल विनायक मेटे की मौत के बाद फिर से यह मामला जोर पकड़ लिया है। विभिन्न लोगों की तरफ से इसे लेकर मांग भी होने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने आज तक इस संबंध में स्पष्ट नीति और सड़क दुर्घटनाओं में चिकित्सा उपचार के लिए एयर एंबुलेंस के संबंध में एक साधारण नीति भी तय नहीं की है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस पर तीन सालों में हुए हैं ७१४ सड़क हादसे
जानकारी के अनुसार अकेले मुंबई-पुणे एक्सप्रेस हाई-वे पर २०१९ से २०२१ के बीच ७१४ सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें २४६ लोगों की मौत हो गई, जबकि ३८७ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। राज्य में २०२१ में हुए १२,५५३ हादसों में १३,५२८ लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय महामार्गों पर हुए ३,१५१ हादसों में ३,४११ लोगों की मौत हुई, जबकि इन हादसों में २,०४९ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
राज्य में मंजूर हैं १०८ ट्रामा केयर सेंटर
स्वास्थ्य विभाग के तहत राज्य में कुल १०८ ट्रॉमा केयर सेंटर मंजूर हैं। नई व्यापक योजना में ४० और केंद्रों को मंजूरी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि विभाग के ६३ ग्रामीण और उपजिला अस्पतालों में ट्रॉमा केयर सेंटर शुरू किए जाने के बाद भी प्राथमिक उपचार का ही प्रावधान है। जानकारी के अनुसार एक ट्रामा केयर सेंटर पर १५ करोड़ का खर्च आएगा। इसकी तुलना में एयर एंबुलेंस कम खर्चीली है।

टर्सरी ट्रॉमा केयर अस्पताल के प्रति सरकार उदासीन
केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ट्रामा केयर अस्पताल शुरू करने की नीति तैयार की है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने भी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। हालांकि राज्य सरकार टर्सरी ट्रॉमा केयर अस्पताल शुरू करने के प्रति उदासीन है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि विभाग को इसके लिए पर्याप्त निधि मुहैया न कराए जाने से सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए स्वास्थ्य टर्सरी ट्रॉमाकेयर अस्पताल सही मायने में नहीं शुरू हो सका है।

 

 

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